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अब सरकार कराएगी फेक न्यूज की जांच, I&B के PSU ने जारी किया टेंडर, गलत जानकारी फैलाने वालों की लोकेशन भी होगी ट्रैक

आशीष आर्यन की रिपोर्ट: साइबर लॉ एक्सपर्ट्स को डर- सरकार इसके लिए जरिए करा सकती है लोगों की निगरानी।

Author Updated: June 10, 2020 8:31 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

आशीष आर्यन की रिपोर्ट:

भारत में फेक न्यूज के बढ़ते दायरे के बीच अब इनके स्रोतों की पहचान के लिए खुद सरकार ने मोर्चा संभालने का फैसला किया है। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B मिनिस्ट्री) के अंतर्गत आने वाली ब्रॉडकास्टर इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) ने टेंडर भी उतारे हैं। इन टेंडरों में फैक्ट चेकिंग और गलत खबरों की पहचान के लिए एजेंसियों को समाधान और सेवा मुहैया कराने का न्योता दिया गया है।

टेंडर में BECIL ने बिडिंग करने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया है कि वे गलत खबरों के पीछे के स्रोतों का पता लगाएं, जिनमें उनकी जियो लोकेशन भी शामिल हो। हालांकि, साइबर लॉ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे सरकार के पास लोगों की अवैध निगरानी के रास्ते खुल जाएंगे और यह संदिग्ध व्यक्तियों की खोज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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साइबर लॉ कंपनी टेकलेगिस एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के संस्थापक सलमान वारिस ने कहा, “गर हम नहीं जानते कि क्या फेक न्यूज है और क्या नहीं, तो जिसे टेंडर मिलेगा वो इसका पता कैसे लगाएगा कि क्या सही है और क्या फेक? किस चीज की पहचान जरूरी है और किसका सत्यापन? हालांकि, इससे उनके लिए अवैध और अनैतिक तरीके से निगरानी के रास्ते जरूर खुल जाएंगे।”

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि वह अभी भी फेक न्यूज की गाइडलाइंस पर काम कर रहा है। पहले ही प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) मीडिया में आने वाली न्यूज और सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट्स की फैक्ट चेकिंग करता रहा है। हालांकि, इससे पहले सरकार कई बार सोशल मीडिया कंपनियों पर ही फेक न्यूज और गलत जानकारी के फैलाव को रोकने की जिम्मेदारी डाल चुकी है। अगस्त 2018 में ही सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोशल मीडिया कंपनियों से कहा था कि उन्हें फेक न्यूज को रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रसाद ने यह सुझाव देश में मॉब लिंचिंग की कुछ घटनाओं के बाद दिए थे।

BECIL से फिलहाल इस बारे में पूछा गया कि क्या संस्था फेक न्यूज और गलत जानकारी को लेकर किसी परिभाषा पर पहुंची है या किसी एजेंसी ने 13 मई को निकाले गए इस टेंडर को भरा है। हालांकि, अब तक इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

BECIL ने टेंडर के लिए बोली लगाने वाली एजेंसियों के लिए फेक न्यूज फैलाने वालों की पहचान के साथ उनकी जियो-लोकेशन निकालने का प्रावधान भी रखा है। साथ ही हिंसा भड़काने से जुड़ी फोटो-वीडियो डालने वालों की पहचान करने को भी कहा है। इसके अलावा टेंडर में डेटा के वर्गीकरण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा है।

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