सिंधु जल संधि भारत ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। भारत सरकार ने इस संधि को लेकर कहा कि आने वाले समय में पाकिस्तान को सिंधु जल सिस्टम से एक बूंद पानी भी नहीं मिलेगा।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार सिंधु जल सिस्टम को लेकर काम कर रही कि पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं मिलेगा।
पाकिस्तान में एक बूंद पानी भी न बहे-सीआर पाटिल
सीआर पाटिल ने कहा कि सिंधु जल संधि समाप्त नहीं की गई है, बल्कि निलंबित कर दी गई है और पाकिस्तान पानी के प्रवाह को रोकने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा, “इस संधि को लेकर जब से पीएम मोदी ने यह फैसला लिया है, तब से यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है कि वहां एक बूंद भी पानी न बहें।”
सरकार रख रही नजर- केंद्रीय मंत्री
सीआर पाटिल ने आगे कहा कि सरकार उच्च स्तर पर इस मामले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। जल शक्ति मंत्री ने कहा, “पीएम के निर्देशों के तहत गृह मंत्री अमित शाह भी व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी कर रहे हैं और हम इस पर सक्रिय रूप से काम कर रहे है्ं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि काम समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। यह निश्चित है कि आने वाले सालों में पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होगी, मैं आपको इतना भरोसा दिला सकता है।”
उनकी ये टिप्पणी पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और भारत द्वारा 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद आई है।
भारत किसी भी कोर्ट को नहीं मानता- विदेश मंत्रालय
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने संधि के तहत गठित मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार को खारिज कर दिया था। हाल ही में न्यायाधिकरण द्वारा अधिकतम भार मुद्दे पर जारी किए गए एक फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस कोर्ट को अवैध रूप से गठित मानता है और इसके किसी भी फैसले को मान्यता नहीं देगा।
विदेश सचिव ने कहा, “भारत इस तथाकथित फैसले को स्पष्ट रूप से खारिज करना है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित न्यायाधिकरण के सभी पूर्व निर्णयों को दृढ़ता से खारिज किया है।” उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही, पुरस्कार या निर्णय अमान्य है।
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भारत ने शनिवार को सिंधु जल संधि (IWT)के तहत हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय द्वारा जारी नवीनतम फैसले को दृढ़ता से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नई दिल्ली न तो “अवैध रूप से गठित” न्यायाधिकरण को मान्यता देता है और न ही उसके किसी भी फैसले को कानूनी रूप से वैध मानता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय लागू रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
