भारत ने शनिवार को सिंधु जल संधि (IWT)के तहत हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय द्वारा जारी नवीनतम फैसले को दृढ़ता से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नई दिल्ली न तो “अवैध रूप से गठित” न्यायाधिकरण को मान्यता देता है और न ही उसके किसी भी फैसले को कानूनी रूप से वैध मानता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय लागू रहेगा।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय (COA) ने 15 मई को संधि की व्याख्या से संबंधित एक पूर्व फैसले के संदर्भ में “अधिकतम भार” के बारे में एक निर्णय जारी किया था। जायसवाल ने कहा, “भारत इस तथाकथित निर्णय को स्पष्ट रूप से खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित सीओए के सभी पूर्व निर्णयों को दृढ़ता से खारिज किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत ने इस तथाकथित संधि आयोग की स्थापना को कभी मान्यता नहीं दी है। इसके द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही, निर्णय या फैसला अमान्य है।” ये नई टिप्पणियां अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच आई हैं, जिसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी।

विश्व बैंक की मध्यस्थता से संपन्न यह संधि दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। समझौते के तहत, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब पर अधिकार प्राप्त है, जबकि भारत को पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज पर नियंत्रण प्राप्त है।

इस संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत जल पर अधिकार प्राप्त हो जाता है, जबकि भारत लगभग 20 प्रतिशत जल को अपने पास रखता है, साथ ही पश्चिमी नदियों पर सिंचाई, बिजली उत्पादन और अन्य गैर-उपभोक्ता उद्देश्यों के लिए सीमित उपयोग अधिकार भी प्राप्त करता है। महज एक हफ्ते पहले जायसवाल ने जोर देकर कहा था कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के लिए अपना समर्थन “विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से” समाप्त नहीं कर देता।

उन्होंने कहा था कि सिंधु जल संधि पर हमारा रुख हमेशा एक जैसा रहा है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के जवाब में इसे फिलहाल स्थगित रखा गया है। पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को स्पष्ट और पूरी तरह से त्यागना होगा। क्योंकि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते हैं।

‘नेहरू ने पाकिस्तान को दिए थे नहर बनाने के लिए पैसे’, सदन में पीएम मोदी ने सिंधु जल संधि का किया जिक्र

मोदी ने कह कि सिंधु जल संधि नेहरू की सबसे बड़ी भूल थी। वह ऐसी कूटनीति जानते थे जिसमें भारत के किसानों के लिए कोई जगह नहीं थी। उन्होंने कहा कि उत्तरवर्ती सरकारों ने इस गलती को नहीं सुधारा, लेकिन हमने यह स्पष्ट कर दिया कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। पढ़ें पूरी खबर।