Indus Waters Treaty: पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पानी के मोर्चे पर परेशानियों का सामना कर रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि साल भर पहले भारत ने सिंधु जल समझौते को रद्द करने का जो फैसला किया था। भारत सरकार उस पर अभी भी पूरी प्रतिबद्धता से कायम है। इसका नतीजा ये हैं कि जम्मू-कश्मीर के रामबन स्थित बगलिहार बांध से पाकिस्तान की ओर जाने वाला पानी बंद है। बता दें कि चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध की पनबिजली उत्पादन और जल प्रबंधन में अहम भूमिका है।

जानकारी के मुताबिक, सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद से बांध गेटों को बंद कर दिया गया था। इन दरवाजों के बंद हुए एक साल से ज्यादा का वक्त हो गया है, जिस तरह से पाकिस्तान की ओर जाने वाला पानी रोका गया है, इससे पाकिस्तान भी बेहद परेशान है। वह बार-बार सिंधु संधि और चिनाब के प्रोजेक्ट पर अपना विरोध जताता रहा है, हालांकि उसे हर बार झटके-पर-झटके लग रहे हैं।

क्या है सिंधु जल संधि? (What is Indus Waters Treaty)

सिंधु जल संधि की बात करें तो ये भारत और पाकिस्तान के बीच नदी के पानी के बंटवारे के संबंधित है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया था और इस संधि को निलंबित करने का ऐलान कर दिया था। संधि को निलंबित करने के बाद भारत ने बगलिहार बांध के गेटों का लगातार बंद रखा, जो कि पाकिस्तान के लिए एक चिंताजनक स्थिति का संकेत है।

सिंधु जल संधि के मामले में पाकिस्तान की परेशानी यह है कि पाकिस्तान को सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में पानी भारत से जाने वाली नदियों से मिलता है, लेकिन वो पानी की आपूर्ति भारत के सख्त रवैए के चलते लगातार कम होती जा रही है, जिसके चलते पाकिस्तान के आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत का कदम महत्वपूर्ण क्यों?

गौरतलब है कि भारत सरकार ने अपने हिस्से में आने वाली सभी पूर्वी नदियों के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकसित कर ली हैं, और सिंधु जल संधि को रद्द कर रखा है। इन नदियों में भाखड़ा बांध, ब्यास नदी पर पोंग बांध और पंडोह बांध और रावी नदी पर रणजीत सागर बांध शामिल है।

इसके अलावा वहीं ब्यास-सतलुज लिंक, माधोपुर-ब्यास लिंक और इंदिरा गांधी नहर परियोजना से भारत को पूर्वी नदियों के पानी का इस्तेमाल करने में मदद मिली है। पाकिस्तान की ओर से बार-बार सिंधु जल संधि के मुद्दे पर भारत को घेरने की कोशिश की गई है।

पाकिस्तान लगातार करता रहा नाकाम कोशिशें

पाकिस्तान का लगातार यह दावा करता रहा है कि भारत का एकतरफा तरीके से सिंधु जल संधि को नहीं रोक सकता है। पाकिस्तान का कहना है कि पानी के रोकने को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। पाकिस्तान की सरकार ने चिनाब नदी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव पर चिंता जताते हुए भारत को पत्र भी लिखे हैं। हालांकि भारत सरकार ने इन बातों को सिरे से खारिज किया है, जबकि पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर यह मुद्दा उठा रहा है, लेकिन उसे कुछ खास समर्थन नहीं मिल रहा है।

सिंधु जल संधि पर सरकार का बड़ा कदम: जम्मू-कश्मीर में 46% बढ़ेगी हाईड्रो पावर क्षमता, परियोजनाओं में आई तेजी

सिंधु जल संधि के निलंबित होने से जम्मू-कश्मीर में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट्स का निर्माण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में, इस केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा साल के आखिर तक हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर की कुल क्षमता में कम से कम 46% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। पढ़िए पूरी खबर…