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45 साल पहले 12 जून 1975 को पीएम इंदिरा गांधी का चुनाव कर दिया था रद्द, कोर्ट में बुलाकर ली थी गवाही, जानें- कौन थे जज जगमोहन सिन्हा?

Todays History, 12 June, 12 June 1975 history: जस्टिस सिन्हा जब इंदिरा पर फैसला सुनाकर घर लौटे तो वो उसी तरह सामान्य थे जैसे अन्य दिनों की तरह होते थे। 20 मार्च 2008 को 88 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

Allahabad High Court, Verdict on Indira Gandhi's Electionजस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा। (ट्विटर फोटो)

Todays History, 12 June, 12 June 1975 history: जून के महीने में भारत की आबोहवा इस कदर गर्म और तपिश से भरी होती है कि सब कुछ खौलने सा लगता है, लेकिन 1975 में देश की सियासत की तपिश इतनी ज्यादा थी कि उसने मौसम की गर्मी को भी पीछे छोड़ दिया। दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 जून 1975 के दिन देश के राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल का दोषी ठहराते हुए उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया।

यह मामला 1971 के लोकसभा चुनाव के सिलसिले में विपक्ष के नेता राजनारायण ने दाखिल किया और कोर्ट ने इंदिरा गांधी को चुनाव में अनुमति से ज्यादा धन व्यय करने और सरकारी संसाधनों के दुरूपयोग का दोषी पाया। उनके किसी भी राजनीतिक पद ग्रहण करने पर रोक लगा दी गई। 45 साल पहले कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी को कोर्ट रूम में बुलाया। पांच घंटे से ज्यादा समय तक उनसे पूछताछ की गई और इसके बाद देश की सबसे ताकतवर नेता का निर्वाचन रद्द कर दिया गया।

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कौन थे जस्टिस जगमोहन सिन्हा?
इंदिरा गांधी का केस जस्टिस जगमोहन सिन्हा के जीवन का सबसे बड़ा केस साबित हुआ। इंदिरा के खिलाफ चुनाव हारने वाले राजनायारण के वकील शांति भूषण उनकी कोर्ट में उनकी पैरवी कर रहे थे। वो लिखते हैं कि इंदिरा गांधी को कोर्ट रूम में बुलाने से जज सिन्हा ने कहा था कि कोई कोर्ट की परंपरा है कि लोग तभी खड़े हों जब जज अंदर दाखिल हो। इसलिए जब कोई गवाह कोर्ट रूम में दाखिल हो तो वहां मौजूद किसी को खड़ा नहीं होना चाहिए। बाद में जब इंदिरा गांधी कोर्ट रूम में दाखिल हुई तो उनके वकील एससी खरे को छोड़कर कोई खड़ा नहीं हुआ। खरे भी पूरी तरह खड़े नहीं हुए। भूषण ने बताया कि इंदिरा गांधी के लिए कटघरे में एक कुर्सी का इंतजाम किया गया था ताकि वो बैठकर अपनी गवाही दे सकें।

इधर इंदिरा गांधी पर फैसले से पहले अलग-अलग तरह से संपर्क कर जस्टिस सिन्हा को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। पीएम के निजी डॉक्टर माथुर जो सिन्हा के रिश्तेदार थे, वो भी प्रस्ताव लेकर जस्टिस सिन्हा के पास पहुंचे थे कि अगर फैसला पक्ष में सुनाया गया तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया जाएगा। मगर उन्होंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनपर पीएम पर फैसले को टालने का भी दबाव बनाया गया, मगर वो टस से मस नहीं हुए।

जस्टिस सिन्हा ने दो मामलों में इंदिरा गांधी को दोषी पाया
जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी को दो मामलों में अनुचित साधन के इस्तेमाल का दोषी पाया। पहला की पीएम इंदिरा के सचिवालय में काम करने वाले यशपाल कपूर को उनका चुनाव एजेंट बनाया गया जबकि वो उस वक्त सरकारी अफसर थे। दूसरा कोर्ट ने माना कि इंदिरा गांधी ने लाउडस्पीकरों और शमियाने की व्यवस्था सरकारी राशि पर करवाई।

जस्टिस सिन्हा जब इंदिरा पर फैसला सुनाकर घर लौटे तो वो उसी तरह सामान्य थे जैसे अन्य दिनों की तरह होते थे। देश की राजनीति को हिला देने वाला फैसला देने वाले जस्टिस सिन्हा को पार्क में घूमने का बहुत शौक था। 20 मार्च 2008 को 88 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

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