भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) में बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स (Pieter Elbers) ने सोमवार, 10 मार्च को अपने पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। इस बारे में जानकारी कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी और आधिकारिक बयान भी जारी किया। फिलहाल कंपनी के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया (Rahul Bhatia) एयरलाइन के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंपनी ने कहा है कि नए सीईओ की नियुक्ति जल्द किए जाने की उम्मीद है।

पिटर एल्बर्स ने अपने इस्तीफे के पत्र में कहा कि वह व्यक्तिगत कारणों की वजह से पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने करीब तीन साल तक एयरलाइन का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नेटवर्क का काफी विस्तार किया, जिसे वे “इंटरनेशनलाइजेशन” यानी अंतरराष्ट्रीय विस्तार की रणनीति कहा करते थे।

हालांकि उनके इस्तीफे से कुछ महीने पहले ही एयरलाइन को एक बड़े संकट का सामना करना पड़ा था। दिसंबर की शुरुआत में कंपनी की उड़ानों में भारी गड़बड़ी हुई थी। नई और ज्यादा सख्त पायलट ड्यूटी और आराम (ड्यूटी-रेस्ट) नियमों को ठीक से लागू करने के लिए पर्याप्त योजना नहीं बनाई गई थी। इसी वजह से कंपनी का पूरा ऑपरेशन बिगड़ गया। कुछ ही दिनों में हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

इस संकट ने एयरलाइन की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया। लगभग दो दशकों से कंपनी की संचालन व्यवस्था काफी भरोसेमंद मानी जाती थी, लेकिन इस घटना के बाद लाखों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। उस समय घरेलू विमानन बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत थी। इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से यात्रियों में भारी नाराजगी देखी गई और सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया।

दिसंबर के इस संकट को लेकर राहुल भाटिया ने कर्मचारियों को भेजे गए एक संदेश में कहा कि ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था। उन्होंने लिखा कि उस समय कंपनी के ग्राहकों को ऐसी परेशानी नहीं झेलनी चाहिए थी और न ही कर्मचारियों को, खासकर फ्रंटलाइन स्टाफ को, जिन्हें बिना गलती के सबसे ज्यादा दबाव सहना पड़ा।

कठिन हालातों में काम करने के लिए कर्मचारियों की सराहना की

भाटिया ने अपने संदेश में उन कर्मचारियों की भी सराहना की, जिन्होंने कठिन हालात में भी लगातार काम किया और कई रातों तक जागकर कंपनी के संचालन को फिर से पटरी पर लाने में मदद की। उन्होंने कहा कि यही कर्मचारी वास्तव में कंपनी की असली ताकत हैं। अपने ई-मेल के अंत में उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में “राहुल (उर्फ ‘Main Hoon Naa’)” लिखकर साइन भी किया।

उन्होंने कर्मचारियों से यह भी कहा कि कंपनी की कार्यसंस्कृति को और मजबूत करना और संचालन में उत्कृष्टता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। भाटिया ने सभी से अपील की कि वे एकजुट रहें, जिम्मेदारी के साथ काम करें और यात्रियों को सस्ती टिकट के साथ आसान और सम्मानजनक यात्रा अनुभव देने पर ध्यान बनाए रखें।

पिटर एल्बर्स को विमानन उद्योग में करीब 30 साल का अनुभव है। वह सितंबर 2022 में, कोविड-19 महामारी के बाद के दौर में, इंडिगो के सीईओ बने थे। इससे पहले वे करीब आठ साल तक डच एयरलाइन केएलएम रॉयल डच एयरलाइंस (KLM Royal Dutch Airlines) के प्रेसिडेंट और सीईओ रह चुके थे।

इंडिगो में उनके नेतृत्व के दौरान कंपनी ने केवल भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया। इसी दौरान एयरलाइन ने अपने मॉडल में भी बदलाव किए। पहले इसे एक सामान्य लो-कॉस्ट एयरलाइन माना जाता था, लेकिन अब कंपनी कुछ प्रमुख रूटों पर बिजनेस क्लास सेवा भी देने लगी है। इसके अलावा एयरलाइन ने बड़े विमानों के साथ लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत भी की और यूरोप के कई शहरों के लिए उड़ानें शुरू कीं।

आज इंडिगो दुनिया की सबसे ज्यादा यात्रियों को ले जाने वाली बड़ी एयरलाइनों में गिनी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में उसने भारत के घरेलू विमानन बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। कंपनी ने बड़ी संख्या में नए विमानों का ऑर्डर भी दिया है, जिसमें लंबी दूरी की उड़ानों के लिए वाइड-बॉडी जेट भी शामिल हैं।

दिसंबर में हुआ संचालन संकट 3 दिसंबर को शुरू हुआ था और 5 दिसंबर को अपने चरम पर पहुंच गया। उस दिन एयरलाइन की 2300 से ज्यादा दैनिक उड़ानों में से 1600 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। बाद में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation DGCA) ने कुछ विशेष छूट दी, जिससे कंपनी कुछ दिनों में अपने संचालन को फिर से सामान्य करने में सफल रही।

हालांकि इस मामले में डीजीसीए ने एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई भी की। नियामक ने इंडिगो को अपने स्वीकृत घरेलू शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया। इसके अलावा जनवरी में डीजीसीए ने इस संचालन गड़बड़ी के लिए एयरलाइन पर कुल 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही कंपनी के शीर्ष प्रबंधन, जिनमें पिटर एल्बर्स भी शामिल थे, को चेतावनी दी गई।

यह जुर्माना डीजीसीए द्वारा किसी भी एयरलाइन पर लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा नियामकीय जुर्माना माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह राशि वित्त वर्ष 2024-25 में इंडिगो के औसत एक दिन के शुद्ध लाभ से भी थोड़ी ज्यादा है।

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में तेजी आने का असर दिखने लगा है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 मार्च से हर घरेलू उड़ान के टिकट पर 399 रुपये का ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लागू करेंगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी ईंधन अधिभार बढ़ाया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक