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इस ट्रेन ने 1 जून को पूरे कर ल‍िए 105 साल, 1912 में केवल तीन पैसेंजर बोग‍ी के साथ शुरू क‍िया था सफर

यह ट्रेन महज 47 घंटे में 2496 किलोमीटर की दूरी तय करती थी।

शुरूआत में पंजाब मेल में केवल 6 कोच होते थे। इनमें से तीन लोगों के लिए होते थे और तीन सामान के लिए होते थे।

भारतीय रेलवे की सबसे पुरानी लंबी दूरी की ट्रेनों में से एक पंजाब मेल के आज (1 जून 2017) 105 साल पूरे हो गए हैं। बॉम्बे से पेशावर के बीच 1 जून 1912 को पंजाब मेल बॉम्बे के बैलार्ड पियर मोल स्टेशन से पहली बार चली थी। 1912 में कुछ मिनट की देरी से दिल्ली पहुंचने पर एक यात्री ने ट्रेन के खिलाफ शिकायत भी की थी। पंजाब मेल फ्रंटियर मेल से 16 साल से ज्यादा पुरानी है। बैलार्ड पियर मोल स्टेशन जीआईपीआर सेवाओं का केंद्र था। कोलोनिअल इंडिया में अपनी पहली पोस्टिंग के समय अधिकारियों और उनकी पत्नियों के लिए मेल में पी एंड ओ स्टीमर लगाए गए थे। साउथेम्प्टन और बॉम्बे के बीच स्टीमर यात्रा 13 दिन तक चली थी। ब्रिटिश अधिकारियों ने बॉम्बे की अपनी यात्रा के लिए संयुक्त टिकट का आयोजन किया था। साथ ही उनके पोस्टिंग के स्थान तक पहुंचने के लिए ट्रेन की व्यवस्था थी। मद्रास, कलकत्ता और दिल्ली के लिए एक ट्रेन की व्यवस्था की गई थी। अब पंजाब मेल, तब पंजाब लिमिटेड को सबसे अच्छी ट्रेन माना जाता था।

पंजाब लिमिटेड बॉम्बे के बैलार्ड पियर मोल स्टेशन से पेशावर के लिए एक निश्चित दिन चलती थी। वह महज 47 घंटे में 2496 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। उस समय ट्रेन में 6 कोच होते थे। इनमें से तीन लोगों के लिए होते थे और तीन सामान के लिए होते थे। एक कोच में 96 लोग बैठ सकते थे। सभी कोचों में दो बर्थ वाले कंपार्टमेंट बने हुए थे। इनमें खानपान की अच्छी व्यवस्था होती थी। इनमें टॉयलेट, बाथरूम, एक रेस्तरां की सुविधा होती थी। वहीं सामान वाले कंपार्टमेंट में अधिकारियों के नौकरों की भी व्यवस्था होती थी। विभाजन से पहले के ब्रिटिश भारत में पंजाब लिमिटेड सबसे तेज ट्रेन थी।

पंजाब लिमिटेड एक बड़े रूट को कवर करती थी। वह इटारसी, आगरा, दिल्ली, अमृतसर और लाहौर होते हुए पेशावर कैंट तक पहुंचती थी। 1914 से ट्रेन की मुबई वीटी (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई) से ही चलने लगी और वहीं आकर टर्मिनेट होने लगी थी। धीर-धीरे पंजाब लिमिटेड की सर्विस डेली हो गई और इसे पंजाब मेल के नाम से जाना जाने लगा। इस ट्रेन की सर्विस पहले सिर्फ अधिकारियों के लिए ही थी। इसके बाद 1930 के मध्य में पंजाब मेल में थर्ड क्लास कोच को भी जोड़ा गया। 1914 में पंजाब मेल को दिल्ली से बॉम्बे के बीच 1,541 किलोमीटर की दूरी को तय करने में 29 घंटे 30 मिनट का समय लगता था। वहीं 1,920 में इस टाइम को घटाकर 27 घंटे 10 मिनट किया गया और इस बीच यह 18 स्टेशनों पर रुकती थी।

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