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अमेरिका संग चल रही व्यापारिक बातचीत पर मोहन भागवत ने चेताया, स्वदेशी की वकालत कर बोले- अपनी शर्तों पर करें मोलभाव

आर्थिक मंदी और व्यापार समझौतों पर आरएसएस प्रमुख की टिप्पणी महत्वपूर्ण है कि क्योंकि उनके विचार आने वाले दिनों में FDI, विनिवेश और व्यापार सौदों पर सरकार के प्रस्तावों के खिलाफ संघ परिवार के एक वर्ग को प्रभावित कर सकते हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: October 9, 2019 8:27 AM
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत।

अमेरिका और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते के साथ व्यापार पर भारत की बातचीत पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को भारत सरकार को ज्यादा झुकने के चलते आगाह किया। विजयदशमी पर अपने वार्षिक संबोधन में भागवत ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वदेशी की वकालत करते हुए सुझाव दिया कि देश ‘हमारी ताकत और शर्तों के आधार पर दुनिया के साथ व्यापार संबंधों का निर्माण और विस्तार करें।’ स्वदेशी की वकालत के लिए उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगडी को भी आमंत्रित किया।

आर्थिक मंदी और व्यापार समझौतों पर आरएसएस प्रमुख की टिप्पणी महत्वपूर्ण है कि क्योंकि उनके विचार आने वाले दिनों में FDI, विनिवेश और व्यापार सौदों पर सरकार के प्रस्तावों के खिलाफ संघ परिवार के एक वर्ग को प्रभावित कर सकते हैं। संयोग से पिछले साल विजयदशमी के ही दिन राम मंदिर पर उनकी टिप्पणी के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने सरकार दबाव बनाया। संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर रैलियों के जरिए सरकार से लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण के लिए एक कानून बनाने की मांग की। इसपर सरकार को सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ा।

मंगलवार को अर्थव्यवस्था और व्यापार जैसे नए मुद्दे थे जिनका भागवत ने अपने भाषण में जिक्र किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘हम सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के मद्देनजर निश्चित रूप से तथाकथित मंदी के इस चक्र से बाहर आएंगे।’ उन्होंने कहा ‘हम इससे (मंदी) बाहर निकल आएंगे। सरकार कोशिश कर रही है। हमें धन की आवश्यकता है और इसके लिए सरकार एफडीआई को बढ़ावा दे रही हैं। कुछ बड़े उद्योगों में विनिवेश किया जा रहा है। जब यह (विनिवेश) आवश्यक है, तो ऐसा करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यह एक समाधान है।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘तथाकथित’ अर्थिक मंदी के बारे में ‘बहुत अधिक चर्चा’ करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे कारोबारजगत तथा लोग चिंतिंत होते हैं और आर्थिक गतिविधियों में कमी आती है।

उन्होंने कहा, ‘इस पर चर्चा से एक ऐसे परिवेश का निर्माण होता है, जो गतिविधियों को प्रभावित करता है। तथाकथित मंदी के बारे में बहुत अधिक चर्चा से उद्योग एवं व्यापार में लोगों को लगने लगता है कि अर्थव्यवस्था में सच में मंदी आ रही है और वे अपने कदमों को लेकर अधिक सतर्क हो जाते हैं।’ उन्होंने कहा,  ‘सरकार ने इस विषय पर संवेदनशीलता दिखाई है और कुछ कदम उठाए हैं।’ (एजेंसी इनपुट)

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