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सीएम योगी आदित्यनाथ के एक फैसले से यूपी को लग सकती है 56 हजार करोड़ रुपए की चपत

साल 2016 में भारत ने पूरे विश्व में 13,14,158.05 मीट्रिक टन भैस के मांस का निर्यात किया था, जिसकी कीमत 26,681.56 करोड़ रुपए थी। ज्यादातर निर्यात मुस्लिम देशों जैसे मलेशिया, मिस्त्र, सऊदी अरब और इराक में किया गया।

Author नई दिल्ली | Updated: March 21, 2017 11:07 AM
Yogi Adityanath, Yogi Adityanath Six Months, Yogi Adityanath Claims, Yogi Adityanath Attacks, Yogi Adityanath Statement, Crime in Uttar Pradesh, Corruption in ttar Pradesh, Chief Minister Yogi Adityanath, Yogi Adityanath Achievements in Six Months, Yogi Adityanath Achievements, State News, Jansattaमुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना भी नमामि गंगे योजना का हिस्सा है।

बीजेपी यूपी में सरकार बनाने में कामयाब होने के बाद उसका पूरा जोर जनता से किए गए वादों को निभाने पर होगा। पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में कहा था कि अगर वह सत्ता में आती है तो सभी अवैध बूचड़खानों को बंद किया जाएगा। हालांकि, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से कहा गया था कि 12 मार्च से (वोटों की गिनती के अगले दिन) राज्य के सभी बूचड़खाने बंद होंगे। शाह का यह बयान पहले चरण के चुनाव के बाद आया था। रविवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बीजेपी के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने शाह के वादे को याद दिलाया। शर्मा ने योगी आदित्यनाथ की ओर से अपने सभी मंत्रियों को ऐसे बयानों से बचने के लिए कहा है, जिससे किसी की भावनाएं आहत होती हो। यूपी में स्लाटर हाउस (बूचड़खाने) पर पाबंदी लगाई जाती है तो इसका असर इकोनॉमी और रोजगार दोनों पर पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से यूपी को हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक यूपी ने साल 2014-15 में 7,515.14 लाख किलो भैस के मीट, 1171.65 लाख किलो बकरे का मीट, 230.99 लाख किलो भेड़ का मांस और 1410.32 लाख किलो सुअर के मांस का उत्पादन किया था। वर्तमान में भारत में सरकार द्वारा स्वीकृत 72 बूचड़खाने कम मांस प्रोसेसिंग प्लांट हैं, जिनमें से अकेले 38 उत्तर प्रदेश में हैं। साल 2011 में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा जारी लिस्ट के मुताबिक देशभर में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त करीब 30 बूचड़खाने थे, जिसमें से आधे यूपी में थे। साल 2014 में इनकी संख्या बढ़कर 53 हो गई। इसके बाद वाले साल में 11 बूचड़खाने की संख्या और बढ़ गई। इस तरह कुल बूचड़खानों की संख्या 62 हो गई। वर्तमान में यूपी में 38 स्लाटर हाउस है, जिनमें से 7 अलीगढ़ और 5 गाजियाबाद में है।

साल 2016 में भारत ने पूरे विश्व में 13,14,158.05 मीट्रिक टन भैस के मांस का निर्यात किया था, जिसकी कीमत 26,681.56 करोड़ रुपए थी। ज्यादातर निर्यात मुस्लिम देशों जैसे मलेशिया, मिस्त्र, सऊदी अरब और इराक में किया गया। उत्तर प्रदेश में स्लाटर हाउस को 15 साल से बड़े भैसे या बैल या फिर अस्वस्थ्य नस्ल को काटने की इजाजत है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि वह भैस के मांस का कारोबार करने वालों को टारगेट करेगी या फिर अन्य मीट के अन्य उत्पादों में कारोबार करने वालों को भी टारगेट करेगी।

APEDA की साल 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी देश में सबसे ज्यादा मीट का उत्पादन करने वाला राज्य (19.1 पर्सेंट) है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (15.2 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (10.9 प्रतिशत) का नंबर आता है। साल 2008 से 2013 के दौरान यूपी मीट उत्पादन में सबसे आगे रहा है। 2007 में किए गए 18 वीं पशुधन जनगणना के मुताबिक यूपी गोजातीय जनसंख्या के मामले में भी सभी राज्यों से आगे है। 2012 में आए 19वें पशुधन जनगणना में भी यह बढ़त बरकरार रही। राज्य में इसकी संख्या 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,38,12,000 से बढ़कर 3,06,25,000 हो गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश में 20 गिरावट के साथ जनसंख्या 1,32,71,000 से घटकर 1,06,22,000 हो गई है।

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निर्यात पर प्रतिबंध से राजस्व के मामले में कम से कम 11,350 करोड़ (2015-16) की कमी हो सकती है। बीजेपी की सरकार अगर अपने पूरे कार्यकाल यानी की 5 साल के लिए बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाती है तो उस हिसाब से 56 हजार करोड़ से ज्यादा (5 साल के लिए लागू रहा बैन तो) का नुकसान होगा। साल 2015-16 में यूपी ने 5,65,958.20 मीट्रिक टन भैस के मीट का निर्यात किया था। संसाधनों या गोजातीय नंबरों के साथ देश में कोई अन्य ऐसा राज्य नहीं है, जो यूपी की जगह को भर सके।

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