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CDS बिपिन रावत बोले- जम्मू और कश्मीर में मासूम बच्चों को बना दिया जाता है कट्टर, उकसाने वालों से ‘दूर’ करने की है जरूरत

यह पहला मौका है जब किसी शीर्ष अधिकारी ने भारत में चरमपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर के बारे में बात की है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 17, 2020 8:05 AM
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) बिपिन रावत। (PTI Photo: Kamal Kishore)

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) बिपिन रावत ने गुरुवार (16 जनवरी, 2020) को पिहली बार खुलासा करते हुए कहा कि देश में कट्टरपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर चल रहे हैं क्योंकि यह वैसे लोगों को अलग करने के लिए जरूरी है, जिनका पूरी तरह चरमपंथीकरण हो चुका है। ‘रायसीना डायलॉग’ को संबोधित करते हुए जनरल रावत ने कश्मीर में हालात का जिक्र करते हुए कहा कि घाटी में 10 और 12 साल के लड़के-लड़कियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है, जो चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा, ‘‘इन लोगों को धीरे-धीरे कट्टरपंथ से अलग किया जा सकता है। हालांकि, ऐसे लोग भी हैं जो पूरी तरह कट्टरपंथी हो चुके हैं। इन लोगों को अलग से कट्टरपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर में ले जाने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में कट्टरपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर चलाए जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में भी कट्टरपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर हैं। जनरल रावत ने कहा, ‘‘मैं आपको बता दूं कि पाकिस्तान भी ऐसा कर रहा है। पाकिस्तान में भी चरमपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर चलाए जा रहे हैं क्योंकि वे समझ चुके हैं कि जिस आतंकवाद को वे प्रायोजित कर रहे हैं, वह उन्हें भी प्रभावित कर रहा है।’’

यह पहला मौका है जब किसी शीर्ष अधिकारी ने भारत में चरमपंथ से मुक्ति दिलाने वाले शिविर के बारे में बात की है। जनरल रावत ने कहा कि आतंकवाद से प्रभावी तरीके से मुकाबले के लिए कट्टरपंथ को रोकना अहम है। कट्टरपंथी युवा लोग कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पथराव करने में शामिल हैं। कट्टरपंथ की बड़ी चुनौती के रूप में पहचान करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावी कार्यक्रम के जरिए इससे मुकाबला किया जा सकता है।

रावत ने क्षेत्र में आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए कठोर नीति अपनाने का समर्थन करते हुए कहा कि जिस मॉडल को अमेरिका ने 9/11 के हमले के बाद अपनाया था उसे दोहराने की जरूरत है। पाकिस्तान का स्पष्ट संदर्भ देते हुए उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को आतंकवाद विरोध निगरानी सूची एएफटीएफ की ओर से काली सूची में डालने तथा कूटनीतिक रूप से ऐसे देशों को अलग थलग करने की भी वकालत की । रावत ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के जड़ पर कार्रवाई करने की जरूरत है।

रायसीना डायलॉग को संबोधित करते हुए जनरल रावत ने कहा, ‘‘हमें आतंकवाद को खत्म करना होगा और ऐसा केवल उन तौर तरीकों से हो सकता है जैसा अमेरिका ने 9/11 हमले के बाद शुरू किया था। हमें आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई शुरू करना चाहिए और देशों को इसमें एक साथ आना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह करने का प्रयास करने के लिए आपको आतंकवादियों को अलग-थलग करना पड़ेगा। आतंकवाद को कोई प्रायोजित करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।’’

उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले के बाद वाशिंगटन ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी और कानून बनाने के साथ साथ अफगानिस्तान, इराक, ट्यूनिशिया, सोमालिया, माली और नाइजीरिया में हस्तक्षेप किया था। जनरल रावत ने कहा, ‘‘आप उसके साथ साझेदारी नहीं कर सकते जो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में आपके साथ हो और परोक्ष तौर पर युद्ध एवं आतंकवाद को प्रायोजित करता हो। ऐसे देशों को कड़ा अंतरराष्ट्रीय संदेश जाना चाहिए और कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि आतंकवाद विरोधी निगरानी समूह एफएटीएफ द्वारा काली सूची में डालना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘जबतक राष्ट्र प्रायोजित आतंकवाद होगा, हमें इस खतरे के बीच रहना होगा। हमें इसके जड़ का पता लगाकार कार्रवाई करनी होगी।’’ तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करने के सवाल पर जनरल रावत ने कहा कि सभी के साथ शांतिवार्ता शुरू करना चाहिए लेकिन इस शर्त पर कि वे आतंकवाद को छोड़ें।

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