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आर्थिक प्रगति में भारत से पिछड़ा चीन, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मुताबिक 2011-2012 के स्थिर मूल्यों पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 33.74 लाख करोड़ रुपए रहा। जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 31.18 लाख करोड़ रुपए था।

एक रुपए का सिक्का। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।)

भारत की अर्थव्यवस्था ने विकास की रफ्तार में चीन को पीछे छोड़ दिया है। विनिर्माण व कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के दम पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.2 फीसद रही। इस तिमाही में चीन की वृद्धि दर 6.7 फीसद रही। इस रफ्तार से सबसे तेज वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की दावेदारी मजबूत हो गई। बीते दो साल में यह सबसे ऊंची छलांग है। बीते तीन साल के दौरान दर्ज की गई यह सर्वाधिक विकास दर है। सरकार ने शुक्रवार को इसके आंकड़े जारी किए।

पहली तिमाही में इस रफ्तार के साथ भारत अब इंग्लैंड को पीछे छोड़ बहुत जल्द दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मुताबिक 2011-2012 के स्थिर मूल्यों पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 33.74 लाख करोड़ रुपए रहा। जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 31.18 लाख करोड़ रुपए था। यह वृद्धि 8.2 फीसद रही। आधारभूत कीमतों के आधार पर तिमाही का सकल मूल्यवर्धन पिछले वित्त वर्ष के 29.29 लाख करोड़ रुपए की तुलना में आठ फीसद बढ़ कर 31.63 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

बता दें कि सरकार ने 2015 में जीडीपी गणना के लिए आधारभूत वर्ष को 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया था। भारत की जीडीपी विकास दर पिछली तिमाही में 7.7 फीसद थी। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 5.59 फीसद था। विनिर्माण, बिजली, गैस, जलापूर्ति व अन्य नागरिक सेवाएं, निर्माण, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में विकास दर सात फीसद से ज्यादा बनी रही। इससे पहले 2014-15 की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में सर्वाधिक तेज वृद्धि हासिल की गई थी। तब जीडीपी की वृद्धि दर 8.4 फीसद रही थी। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र का सकल मूल्यवर्धन 13.5 फीसद की दर से बढ़ा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 1.8 फीसद गिरा था। इस दौरान कृषि, वानिकी और मत्स्यपालन क्षेत्र पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के तीन फीसद की तुलना में 5.3 फीसद की दर से बढ़ा।

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल मूल्य आधारित विकास दर (ग्रॉस वैल्यू एडेड या जीवीए) आठ फीसद रही। जीडीपी के जरिए उपभोक्ताओं और मांग के नजरिए से किसी देश की आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर साफ होती है, जबकि इसके उलट जीवीए के जरिए निमार्ताओं या आपूर्ति के लिहाज से आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर साफ होती है।
जीडीपी के ताजा आंकड़ों से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था का भारत का तमगा और सुरक्षित हो गया है। चीन ने दूसरी तिमाही में 6.7 फीसद की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। बता दें कि चीन में जनवरी से दिसंबर का वित्तीय कैलेंडर लागू है, जबकि भारत में अप्रैल से मार्च का वित्तीय कैलेंडर चलता है। इससे पहले विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इसी साल भारत ने 2.6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किया।

अर्थव्यवस्था में बड़ी उछाल
विनिर्माण व कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के दम पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 33.74 लाख करोड़ रुपए रहा। जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 31.18 लाख करोड़ रुपए था। यह वृद्धि 8.2 फीसद रही। जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में चीन की वृद्धि दर 6.7 फीसद रही है।

आर्थिक वृद्धि 7.5 फीसद से आगे रहेगी : गर्ग
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8.2 फीसद आर्थिक वृद्धि हासिल होने से उत्साहित वित्त मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि पूरे वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि का आंकड़ा 7.5 फीसद से ऊपर निकल जाएगा। आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने यह उम्मीद जताते हुए कहा कि 2018-19 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3 फीसद से ऊपर नहीं जाएगा। डालर के मुकाबले रुपए की गिरावट पर उन्होंने कहा कि यह जल्द ही 68 से 70 के दायरे में होगा। शुक्रवार को रुपया, डालर के मुकाबले 71 रुपए प्रति डालर के रिकार्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

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