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Intolerance पर बोले Art Of Living गुरु श्री रविशंकर, भारत के DNA में है Tolerance

आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु श्री रविशंकर ने कहा की सहिष्णुता भारत के डीएनए में है। देश न कभी असहिष्णु रहा और न ही आज ऐसा है।

वाराणसी | November 26, 2015 3:37 AM
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने श्रीश्री रविशंकर के आर्ट आॅफ लिविंग (एओएल) फाउंडेशन को एक बार फिर झटका दिया है।

आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु श्री रविशंकर ने कहा की सहिष्णुता भारत के डीएनए में है। देश न कभी असहिष्णु रहा और न ही आज ऐसा है। समय के साथ नैतिकता में गिरावट से अपराध जरूर बढ़े हैं लेकिन धर्म जाति से परे सभी इससे प्रभावित होते हैं।

तीन दिवसीय वाराणसी दौरे पर आए आध्यात्मिक गुरु ने पत्रकारों से बुधवार को बातचीत करते हुए कहा कि पुरस्कार लौटाए जाने से सांप्रदायिक तनाव होने जैसा संदेश विदेश में जा रहा है और भारत की छवि गिर रही है।

उन्होंने कहा सोशल मीडिया के कारण यह तेजी से प्रसारित होता है इसे असहिष्णुता करार देते हुए पुरस्कार लौटाना गलत है यदि राजनीति थी तो इसें लेना ही नहीं चाहिए था। उन्होंने कहा साहित्य व कला को निष्पक्ष होना चाहिए। देश में भेदभाव रहित चुनाव के लिए भी यह जरूरी है कि कुछ लोग भले ही दलों से जुड़े लेकिन बाकी निष्पक्ष रहें।
आध्यात्मिक गुरु ने कहा समाज में जो कुछ हो रहा है उसकी जिम्मेदारी से सरकार किनारा नहीं कर सकती। आतंकवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि बेचैनी व तनाव के कारण ऐसा है। उन्होंने बीएचयू के स्वतंत्रता भवन व सनबीम विद्यालय द्वारा आयोजित छात्र सम्मेलन में कहा विज्ञान व आध्यात्म एक दूसरे का पूरक है। पुरानी जड़ों पर ध्यान देना और नए ज्ञान को आगे बढ़ाना विश्व कल्याण के लिए जरूरी है। पूर्ण रूप से ज्ञान हो जाए तो मोक्ष प्राप्त हो सकता है।

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