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अर्चना सोरेंग: जलवायु संकट से बचाने में गुतारेस की करेंगी मदद

अर्चना सोरेंग विश्व के छह अन्य युवा जलवायु कार्यकर्ताओं के साथ उस समूह में शामिल होंगी जो बिगड़ते जलवायु संकट से निपटने के लिए समाधान और सलाह उपलब्ध कराएंगे। समूह के अन्य सदस्यों में सूडान से निसरीन एल्सिम, फीजी से अर्नेस्ट गिब्सन, माल्दोवा से व्लादिस्लाव काइम, अमेरिका से सोफिया कियानी, फ्रांस से नाथन मेतेनियर और ब्राजील से पालोमा कोस्ता को शामिल किया गया है।

UNO, Climate change, UN Secretary General Antonio Gutaraisओड़ीशा के एक छोटे से गांव की खड़िया जनजाति की अर्चना सोरेंग को चार दिन पहले तक ज्यादा लोग नहीं जानते थे। अब उन्हें दुनिया भर के बहुत से लोग जानने लगे हैं।

भारत की जलवायु कार्यकर्ता अर्चना सोरेंग को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अपने नए सलाहकार समूह में शामिल करने के लिए नामित किया है। इस समूह में युवा नेता शामिल हैं, जो बिगड़ते जलवायु संकट से निपटने के लिए परिप्रेक्ष्य एवं समाधान प्रदान करेंगे। अर्चना सोरेंग विश्व के उन छह अन्य युवा जलवायु नेताओं के साथ शामिल होंगी, जिन्हें गुतारेस ने जलवायु परिवर्तन पर युवा सलाहकार समूह के लिए नामित किया है।

ओड़ीशा के एक छोटे से गांव की खड़िया जनजाति की इस लड़की अर्चना सोरेंग को चार दिन पहले तक ज्यादा लोग नहीं जानते थे। अब उन्हें दुनिया भर के बहुत से लोग जानने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने उन्हें अपने नए सात सदस्यीय सलाहकार समूह में शामिल करने का निर्णय किया है, जो जलवायु संकट से निपटने के के लिए सलाह और समाधान उपलब्ध कराएगा।

आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले के बिहाबंध गांव की रहने वाली अर्चना अपने इस नए दायित्व को लेकर बहुत उत्साहित हैं और उनका मानना है कि हमारे पूर्वजों ने युगों तक प्रकृति और इसकी आबोहवा को बचाए रखा तथा अब उसी पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल करते दुनिया पर मंडराते खतरे को कम किया जा सकता है। मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज से रेग्युलेटरी गवर्नेंस की पढ़ाई के दौरान अर्चना का रुझान पर्यावरण नियमन से जुड़े विषय की तरफ हुआ, क्योंकि इसके पाठ्यक्रम में कुछ ऐसी बातें थीं, जो उन्होंने बचपन में अपने पिता से सीखी थीं।

उनका कहना है, ‘मेरे स्वर्गीय पिता ने अपने बुजुर्गों से प्रकृति के संरक्षण का जो सबक सीखा था, वह उन्होंने मुझे भी सिखाया और मुझे लगा कि इस पारंपरिक ज्ञान का प्रसार और संरक्षण होने के साथ ही इसे प्रकृति की विरासत को बचाने में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।’

ओड़ीशा के वसुंधरा में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत आजीविका पर काम करने वाले एक अनुसंधान और नीति सलाहकार संगठन में काम करने वाली अर्चना का कहना है कि वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में विभिन्न स्वदेशी समुदायों के परंपरागत ज्ञान के दस्तावेजीकरण का मौका मिला, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के संरक्षण के लिए किया जा सकेगा।

अर्चना सोरेंग विश्व के छह अन्य युवा जलवायु कार्यकर्ताओं के साथ उस समूह में शामिल होंगी जो बिगड़ते जलवायु संकट से निपटने के लिए समाधान और सलाह उपलब्ध कराएंगे। समूह के अन्य सदस्यों में सूडान से निसरीन एल्सिम, फीजी से अर्नेस्ट गिब्सन, माल्दोवा से व्लादिस्लाव काइम, अमेरिका से सोफिया कियानी, फ्रांस से नाथन मेतेनियर और ब्राजील से पालोमा कोस्ता को शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में बताया कि वह शोध और अनुसंधान में अनुभवी हैं एवं स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए काम कर रही हैं।

अर्चना ने सेंट जॉन मेरी वियानी स्कूल कुतरा से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद राउरकेला, हमीरपुर स्थित कारमेल कांवेंट स्कूल से इंटर किया। पटना वूमेंस कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्रातक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने मुंबई के टीआइएसएस से स्रातकोत्तर की पढ़ाई की। और इस दौरान छात्रसंघ की अध्यक्ष भी रहीं। उनके पिता बिजय कुमार सोरेंग का 2017 में कैंसर के कारण निधन हो गया। उनकी मां उषा केरकेट्टा सेंट जॉन मेरी वियानी स्कूल में पुस्तकालय अध्यक्ष और खेल शिक्षक हैं।

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