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रिपोर्ट: कश्मीर में 27 सालों में 432 टॉर्चर के मामले, 70% आम नागरिक बने निशाना

JKCCS की रिपोर्ट कश्मीर में साल 1990 से 2017 की अवधि तक की है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में सामने आई है जब केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 28 अगस्त, 2019 को पुलिस को सुझाव दिया कि वो थर्ड डिग्री टॉर्चर से बचे, क्योंकि यह तरीका अब पुराना हो चला है।

jammu kashmirप्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में नियमित तौर पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए वहां के नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 1990 से 2017 के बीच 432 लोगों को संस्थागत रूप से यातनाएं दी गई है। इसमें 70 फीसदी पीड़ित नागरिक थे। जम्मू-कश्मीर कोएलिशन ऑफ सिविल सोसायटी (JKCCS) ने हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है।

रिपोर्ट में भारतीय राज्य में नागरिकों के खिलाफ अत्याचार करने, घरों और अन्य संपत्तियों को नष्ट करने, व्यापक मनोवैज्ञानिक यातना देने के चलते अंर्तराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट का समर्थन करने वाले पूर्व संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेष दूत जुआन ई मेंडेज ने कहा, ‘यह उम्मीद की जानी चाहिए कि यह भारत में अन्य नागरिक संगठनों के लिए एक उदाहरण होगा।’ जम्मू-कश्मीर को विश्व में सबसे अधिक सैन्य प्रभाव वाले क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो खतरनाक मानवाधिकारों की स्थिति का संकेत है। JKCCS ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया मौजूदा वक्त में जम्मू-कश्मीर में 6.5 लाख से 7.5 लाख तक सैन्य मौजूदगी है।

29 अगस्त, 2019 को बीबीसी ने रिपोर्ट दी कि कश्मीर के नागरिकों ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा खुद प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी। अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता था, जिसके अधिकतर प्रावधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पिछले महीने निरस्त कर दिए।

बता दें कि JKCCS की रिपोर्ट कश्मीर में साल 1990 से 2017 की अवधि तक की है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में सामने आई है जब केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 28 अगस्त, 2019 को पुलिस को सुझाव दिया कि वो थर्ड डिग्री टॉर्चर से बचे, क्योंकि यह तरीका अब पुराना हो चला है। पुलिस को इसके उलट गुनाहगारों को पकड़ने के लिए बेहतर जांच और फॉरेंसिक एविडेंस का इस्तेमाल करना चाहिए।

जानना चाहिए कि रिपोर्ट के मुताबिक टॉर्चर के सबसे अधिक मामले पीटने, बिजली से करंट लगाना, नंगा कर पीटना, रोलर और मिर्च के पानी में सिर डुबोने जैसे सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक प्रताड़ित हुए 432 लोगों में से 326 को लाठी, रॉड और बेल्ट से पीटा गया। 93 लोगों ने दावा किया कि उन्होंने शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इसमें उनके चेहरे पर कांच बोतल मारना शामिल है। एक पीड़ित ने बताया कि उसके शरीर के गुप्त हिस्से में लात मारी गई।

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