फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक मुलाकात के बाद कई बड़े ऐलान किए गए हैं। भारत और फ्रांस ने एक खास महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। फ्रांस 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को फ्रांस में मौका देगा। बता दें कि मौजूदा वक्त में यह संख्या करीब 10,000 है। मोदी और मैक्रों की इस मुलाकात के बाद दोनों देशों ने ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के तहत अपने रिश्तों को और बेहतर किया है।
राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान वे नई दिल्ली में चल रहे इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट 2026 में भी हिस्सा लेंगे। दोनों नेताओं ने 17 फरवरी को मुंबई में ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की संयुक्त शुरुआत की। यह राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा है। इससे पहले फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के दौरे पर गए थे।
मैक्रों-पीएम मोदी की मुलाकात
शिक्षा के क्षेत्र में पीएम मोदी और फ्रांस राष्ट्राध्यक्ष ने 2030 तक फ्रांस में 30,000 भारतीय छात्रों के स्वागत करने के लक्ष्य की दोबारा पुष्टि की। दोनों नेताओं ने ‘इंटरनेशनल क्लासेस’ पहल की सराहना की। बता दें कि इस पहल से भारतीय छात्रों को फ्रांस के विश्वविद्यालयों में एडमिशन की तैयारी में मदद मिलती है। मोदी-मैक्रों ने मुंबई में ESSEC Business School और CentraleSupélec को साथ लाने वाले नए हब का स्वागत किया। इसके साथ ही साथ ही शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता संबंधी समझौते में प्रस्तावित आने वाले रिवीजंस का भी स्वागत किया।
भारत-फ्रांस संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने फ्रांसीसी हवाई अड्डों के जरिए भारतीय नागरिकों के लिए शुरू होने वाली वीज़ा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का भी स्वागत किया। यह सुविधा फिलहाल छह महीने की पायलट अवधि के लिए है और इसके बाद रिव्यू किया जाएगा।
India-France Year of Innovation 2026 के तहत दोनों देशों के बीच साइंस, टेक्नोलॉजी, एआई, हेल्थकेयर, सतत विकास (sustainable development), कल्चर और एजुकेशन पर कई साझेदारी करेंगे। साइंस और रिसर्च के क्षेत्र में दोनों देश सहयोग को बढ़ावा देते हुए INRIA और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) के बीच एक द्विपक्षीय केंद्र (बाइनैशनल सेंटर) खोला जाएगा।
दोनों नेताओं ने हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए एक रिसर्च सेंटर शुरू करने की भी उम्मीद जताई। यह सेंटर Sorbonne University, AIIMS New Delhi और Paris Brain Institute के सहयोग से स्थापित किया जाएगा।
रक्षा क्षेत्र में भागीदारी
फ्रांस पिछले कई सालों से भारत का सबसे बड़ा डिफेंस पार्टनर रहा है। दोनों देशों के नेताओं ने वायु, नवल और लैंड सिस्टम के साथ-साथ उभरती हुई डुअल-यूज़ टेक्नोलॉजी में जॉइन्ट रिसर्च और प्रोडक्शन को और तेज करने पर सहमति जता। उन्होंने नवंबर 2025 में फ्रांस की Direction générale de l’armement (DGA) और भारत की Defence Research and Development Organisation (DRDO) के बीच रक्षा प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को समर्थन देने के लिए साइन किए गए टेक्निकल एग्रीमेंट का भी स्वागत किया।
दोनों देशों के नेताओं ने हेलीकॉप्टर और जेट इंजन सहयोग पर जारी चर्चाओं का भी स्वागत किया। उन्होंने 26 Rafale-Marine लड़ाकू विमानों की खरीद के कॉन्ट्रैक्ट की तारीफ की और डिफेंस ऐरोनॉटिक्स के एरिया में सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।
एक प्रमुख आकर्षण H125 फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन रहा। यह भारत में प्राइवेट सेक्टर की पहली हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। यह प्रोजेक्ट TATA Advanced Systems और Airbus के सहयोग से शुरू की गई है और इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत एक मील का पत्थर माना जा रहा है। भारत ने जुलाई 2026 में फ्रांस द्वारा आयोजित किए जाने वाले इंटरनेशनल स्पेस समिट का भी स्वागत किया और उसमें अपनी भागीदारी की पुष्टि की।
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पीएम मोदी ने फ्रांस को भारत का स्पेशल पार्टनर बताया और कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ लेवल तक अपग्रेड करने का फैसला किया है। पीएम मोदी ने कहा कि ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का मतलब है कि दोनों देश सिर्फ व्यापार या हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री इलाकों की सुरक्षा और बड़े वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…
