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50 हजार रुपए में वेंटिलेटर बनाने में जुटी दो साल पहले शुरू हुआ यह स्टार्टअप, सात इंजीनियरों ने तैयार किए तीन प्रोटोटाइप, 7 अप्रैल तक पहली मशीन के टेस्टिंग की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश मे अभी करीब 48 हजार वेंटिलेटर ही हैं, हालांकि सरकार ने करीब 50 हजार वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया है।

कोरोनावायरस संक्रमण के गंभीर स्थिति में पहुंचने पर मरीज को वेंटिलेटर की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है।

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच भारत के अस्पतालों पर बोझ बढ़ने के आसार हैं। लॉकडाउन के चलते संक्रमण का असर कुछ धीमा है। लेकिन टेस्टिंग में तेजी आने के साथ ही पीड़ितों के मामले बढ़ रहे हैं। अब तक अन्य देशों के कोरोनावायरस मामले देखने के बाद सबसे साफ चीज है वेंटिलेटर की जरूरत। भारत में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) और मास्क के बाद आने वाले समय में किसी चीज की कमी देखने को मिल सकती है, तो वह है वेंटिलेटर। ऐसे में सरकार ने वेंटिलेटर जुटाने की तैयारियां तेज कर दी है। अब तक कई बड़ी कंपनियों को 50 हजार से ज्यादा वेंटिलेटर्स के ऑर्डर दिए जा चुके हैं। हालांकि, इन सबके बीच भारत की एक स्टार्टअप देश जरूरत के मुताबिक, कम कीमत के वेंटिलेटर के निर्माण में जुट गई है। ताकि जल्द से जल्द हजारों कोरोनावायरस पीड़ितों को इलाज मुहैया कराया जा सके।

महाराष्ट्र के पुणे में स्थित नोक्का रोबोटिक्स ने वेंटिलेटर बनाने की कोशिश में जुटे इंजीनियरों की औसत उम्र महज 26 साल है। उच्च संस्थानों में पढ़े इस ग्रुप में मैकेनिकल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक और एयरोस्पेस स्ट्रीम के छात्र शामिल हैं। महज दो साल पुराने इस स्टार्टअप का टर्नओवर पिछले साल ही 27 लाख रुपए रहा था।
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नोक्का रोबोटिक्स इस वक्त 50,000 रुपए में वेंटिलेटर विकसित करने की कोशिश में जुटा है। सात इंजीनियरों का समूह अब तक इस पोर्टेबल मशीन के तीन प्रोटोटाइप बना भी चुका है। इन्हें फिलहाल कृत्रिम फेफड़ो को सांस देने के लिए टेस्ट किया जा रहा है। इसमें एक प्रोस्थेटिक डिवाइस खून को ऑक्सीजन देने के साथ कार्बनडाइऑक्सइड निकालने के काम आता है। योजना के मुताबिक, स्टार्टअप 7 अप्रैल तक ऐसी मशीन बना लेगा, जो अप्रूवल के बाद मरीजों पर टेस्ट की जा सकेगी।

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अभी कुल मिलाकर 48 हजार वेंटिलेटर हैं। अभी तक यह साफ नहीं है कि इनमें कितनों की ब्रीदिंग मशीन चालू है। हालांकि, इनमें से कई पहले से ही आईसीयू में दूसरे मरीजों की देखभाल में लगाए गए हैं। ट्रेंड्स के मुताबिक, कोरोनावायरस से संक्रमित हर 6 में से 1 व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। सांस की परेशानी के दौरान उसे वेंटिलेटर की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। ऐसे में कम वेंटिलेटरों पर डॉक्टरों के लिए यह फैसला कठिन होता है कि उन्हें किसे इस मशीन पर रखना है।

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