भारतीय शोधकर्ताओं ने विकसित की पारदर्शी सेरेमिक; हेलमेट, फेस शील्ड्स और गॉगल्स को और बेहतर बनाने में मिलेगा फायदा

भारत में पारदर्शी सेरेमिक्स बनाने के प्रयास काफी समय से चल रहे थे, किंतु वे या तो प्रयोगशाला तक ही सिमटे रहे या फिर उनकी पारदर्शिता क्षमता बहुत निम्न स्तर की थी। वर्तमान में जिस प्रक्रिया के तहत इसे विकसित किया गया है, उसका कई तरह से प्रयोग किया जा सकता है।

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पारदर्शी सिरेमिक के नमूने (ऊपर) और एआरसीआई में एचआईपी तकनीक के बाद सिरेमिक। (फोटो- इंडिया साइंस वॉयर)

भारतीय शोधकर्ताओं को एक पारदर्शी सेरेमिक विकसित करने में सफलता मिली है। यह खोज थर्मल इमेजिंग अनुप्रयोगों और हेलमेट, फेस शील्ड्स और गोगल्स जैसे निजी सुरक्षा उपकरणों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है। शोधकर्ताओं ने कोलाइडल प्रोसेसिंग नामक तकनीक से सैद्धांतिक पारदर्शिता के साथ-साथ ताप एवं दबाव के अनुप्रयोगों से अपेक्षित लक्ष्य को प्राप्त किया है। भारत में पहली बार ऐसी कोई तकनीक विकसित हुई है।

पारदर्शी सेरेमिक्स एक अत्याधुनिक सामग्री (मैटीरियल) है। इसमें अद्वितीय पारदर्शिता एवं उत्कृष्ट मैकेनिकल विशिष्टताओं का समावेश है। वैश्विक स्तर पर कई देश पारदर्शी सेरेमिक्स का उत्पादन करते हैं, लेकिन इनका उपयोग रणनीतिक हितों की पूर्ति के लिए भी होता है ऐसे में उनकी आपूर्ति बहुत सीमित और कई मायनों में प्रतिबंधित है।

भारत में पारदर्शी सेरेमिक्स बनाने के प्रयास काफी समय से चल रहे थे, किंतु वे या तो प्रयोगशाला तक ही सिमटे रहे या फिर उनकी पारदर्शिता क्षमता बहुत निम्न स्तर की थी। वर्तमान में जिस प्रक्रिया के तहत इसे विकसित किया गया है, उसका कई तरह से प्रयोग किया जा सकता है। अभी यह प्रायोगिक दायरे में ही है।

पारदर्शी सेरेमिक सैंपल को क्रिटिकली इंजीनियर्ड प्रोसेसिंग पद्धति के जरिये उच्च शुद्धता वाले पाउडर से बनाया गया है। पारदर्शी सेरेमिक्स के लिए ऐसी तैयारी प्रक्रिया आवश्यक है जो अशुद्धियों को बाहर कर सैद्धांतिक पारद्शिता के स्तर को प्राप्त करने में सहायक हो। इसमें रासायनिक वाष्प जमाव (सीवीडी) जिसमें ऊंचे तापमान पर वाष्प चरण में अग्रमामियों की प्रतिक्रियाएं शामिल होती हैं और हॉट आइसोस्टैटिक प्रेसिंग (एचआईपी) जिसमें तापमान और दबाव का एक साथ अनुप्रयोग शामिल होता है, ऐसी कुछ उन्नत प्रसंस्करण तकनीक हैं, जिन्हें प्रायः उपरोक्त चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। दबाव द्वारा उच्च तापमान पर एक परिष्कृत विसरण प्रक्रिया संभावित समाधान में अशुद्धियों को दूर करने के लिए के लिए अपनाई जाती है।

इंटरनेशनल एडवांस रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटालर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई), गुरुग्राम के शोधकर्ताओं ने कोलाइडल प्रसंस्करण के माध्मय से मैग्नीशियम एल्यूमिनेट स्पिनल सिरेमिक को विकसित किया है। यह शोध हाल में “मैटीरियल्स केमिस्ट्री एंड फिजिक्स” में प्रकाशित भी हुआ है।

वर्तमान में स्पाइनेल उत्कृष्ट ऑप्टिकल विशिष्टताओं के साथ एक पारदर्शी सेरेमिक के रूप में उभर रहा है। इसकी क्षमता दृश्यमान अवस्था में 75 प्रतिशत और अवरक्त (इन्फ्रा रेड) रेंज में 80 प्रतिशत से अधिक है। साथ ही इसमें 200 मेगापास्कल से अधिक की उच्चतर क्षमता और 13 गीगापास्कल की कठोरता (हार्डनेस) होती है। जानकार इस खोज को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

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