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रेलवे में करीब 1.5 लाख सेफ्टी स्‍टाफ की कमी, सालों से खाली हैं पद

रायबरेली दुर्घटना के बाद रेलवे की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। रेलवे में सिर्फ सेफ्टी कैटेगरी में ही 1,41,565 पद खाली हैं। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है।

Author नई दिल्‍ली | October 10, 2018 4:48 PM
दिल्ली से लेह तक के सफर को आसान बनाने के लिए दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाइन बनाई जाएगी।

उत्‍तर प्रदेश के रायबरेली में पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन से नई दिल्‍ली आ रही एक्‍सप्रेस ट्रेन (ट्रेन नंबर: 14003) दुर्घटनाग्रस्‍त हो गई। बुधवार (10 अक्‍टूबर) सुबह तकरीबन 6 बजे इंजन समेत 5 बोगियां पटरी से उतर गईं। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनभर से ज्‍यादा लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना ने एक बार फिर से रेलवे की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की खामियों को उजागर कर दिया है। इंडियन रेलवे बड़ी तादाद में स्‍टॉफ की कमी से जूझ रहा है। तकरीबन सभी विभागों में पर्याप्‍त कर्मचारियों की कमी है। हालत यह है कि रेलवे के पास पर्याप्‍त संख्‍या में सेफ्टी स्‍टाफ भी नहीं हैं। ‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेल में फिलहाल सेफ्टी स्‍टाफ की श्रेणी में 1,41,565 पद रिक्‍त हैं। इसके कारण यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे की गंभीरता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

कई पदों के लिए निकाली है वेकेंसी: कर्मचारियों की कमी को देखते हुए इंडियन रेलवे ने विभिन्‍न पदों के लिए 1.20 लाख वेकेंसी निकाली थी। यह भर्ती प्रक्रिया फिलहाल विभिन्‍न चरणों में है। इससे पहले साल के शुरुआत में 89,409 खाली पदों को भरने के लिए वेकेंसी निकाली गई थी। इसमें असिस्‍टेंट लोको पायलट, टेक्निशियन और लेवल-1 (सेफ्टी कैटेगरी से जुड़ा) के पद शामिल हैं। हालांकि, इंडियन रेलवे सेफ्टी कैटेगरी से जुड़े 1,41,565 पदों को अभी तक नहीं भर पाया है। इसके कारण छोटी से चूक के चलते भी रेलवे और यात्रियों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। हालांकि, रायबरेली रेल दुर्घटना की जांच के बाद ही इस हादसे का कारण पता चल सकेगा। लेकिन, इससे पहले भी बोगियों के बेपटरी होने से बड़ी रेल दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

रेल दुर्घटनाओं में आई है कमी: इंडियन रेलवे पिछले कुछ महीनों से पटरियों को दुरुस्‍त करने का काम तेज कर दिया है। रेलवे ने वर्ष 2017-18 में 4,023 किलोमीटर तक के मार्ग का नवीनीकरण किया। यह एक रिकॉर्ड है। वर्ष 2018-19 के लिए 4,400 किलोमीटर का लक्ष्‍य रखा गया है। पटरियों को दुरुस्‍त करने का असर भी दिखा है। रेल दुर्घटनाओं में 40% तक की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2016 में 314 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं। इसमें 192 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, वर्ष 2017 में 187 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 97 लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2018 के पहले 6 महीनों में दुर्घटना की 16 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है।

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