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Indian Railways ने तैयार कर लिया 100 दिनों का ‘ऐक्शन प्लान’, 6400 स्टेशंस पर मिलेंगी ये सुविधाएं

रेलवे इसके अलावा दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई सरीखे व्यस्त रूट्स के बीच का सफर भी लगभग पांच घंटे और कम समय में तय कराने पर भी विचार कर रहा है, जिसके लिए अगले चार सालों में लगभग 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जा सकता है।

Indian Railways: तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

भारतीय रेल ने 100 दिनों का खास ऐक्शन प्लान तैयार कर लिया है, जिसके तहत देशभर में लगभग 6,485 रेलवे स्टेशंस पर यात्रियों को निःशुल्क वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जानकारी के मुताबिक, रेलवे ने इस बाबत 11 प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिनके मुताबिक 31 अगस्त तक शेष स्टेशंस पर वाई-फाई सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है।

‘डीएनए’ के मुताबिक, रेलवे लगभग 1,603 स्टेशंस पर वाई-फाई सेवा से जुड़े उपकरण लगवा चुका है, जबकि बचे हुए समय में शेष 4882 स्टेशंस पर भी ये काम जल्द से जल्द कराने की बात कही जा रही है। मौजूदा समय में पश्चिमी और मध्य रेलवे के करीब 260 स्टेशंस हैं, जहां यह सुविधा पहले से उपलब्ध है। इनमें मुंबई शहर के स्टेशंस भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो आगामी दिनों में मध्य रेलवे 254 स्टेशनों पर और पश्चिमी रेलवे 281 स्टेशंस पर वाई-वाई संबंधी उपकरण फिट कराएंगे।

वरिष्ठ रेल अधिकारी के हवाले से एक अंग्रेजी अखबार में कहा गया, “भारतीय रेल की सब्सिडरी रेलटेल (टाटा ट्रस्ट के साथ टाई-अप में) रेलवायर के नाम से वाई-वाई सुविधा मुहैया कराती है। मुफ्त में इंटरनेट देने के लिए यह (रेलटेल) ब्रॉडबैन्ड और वीपीएन सेवाओं पर जोर देती है। केवल हॉल्ट स्टेशंस पर ही ये सुविधा नहीं होगी, जो कि काफी दूर होते हैं और वहां कम ही यात्रियों की संख्या होती है।”

स्टेशन पर मुफ्त वाई-फाई सेवा का लाभ लेने वालों को सबसे पहले रेलवायर के होमपेज से जोड़ा जाता है, जहां उन्हें अपना मोबाइल नंबर भरना पड़ता है। चंद सेकेंड्स पर रेलवे की ओर से उस पर ओटीपी भेजा जाता है, जिसे डालने पर आधे घंटे (रोजाना) के लिए कोई भी 50 एमबीपीएस की रफ्तार से नेट चला सकता है। हालांकि, आधा घंटा बीत जाने के बाद नेट चलता तो है, पर उसकी रफ्तार घट जाती है।

रिपोर्ट्स की मानें तो रेलवे इसके अलावा दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई सरीखे व्यस्त रूट्स के बीच का सफर भी लगभग पांच घंटे और कम समय में तय कराने पर भी विचार कर रहा है, जिसके लिए अगले चार सालों में लगभग 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जा सकता है। ये दोनों रूट्स 30 फीसदी यात्रियों और 20 प्रतिशत माल ढोने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। मौजूदा समय में दिल्ली-हावड़ा रूट पर सबसे तेज ट्रेन को फासला तय करने में तकरीबन 17 घंटे लगते हैं, जबकि दिल्ली-मुंबई रूट पर तेज से तेज ट्रेन 15.5 घंटों में सफर पूरा कर पाती है।

प्रस्ताव से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से सूत्रों ने यह भी बताया कि रेलवे ने ट्रेनों की रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा से बढ़ा कर 160 किमी प्रतिघंटा करने का लक्ष्य भी रखा है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय मंत्रियों ने रेलवे के लिए ये 100 दिनों का ऐक्शन प्लान तैयार किया है।

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