भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के समय (पंक्चुअलिटी) और देरी की रियल-टाइम निगरानी के लिए अपना पहला इन-हाउस ऐंड्रॉयड आधारित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। दक्षिण तटीय रेलवे (South Coast Railway) के विजयवाड़ा मंडल ने इस ऐप को डिवेलप किया है। ऐप का नाम ‘Punctuality BZA’ रखा गया है। यह नया ऐप रेलवे अधिकारियों को ट्रेनों की आवाजाही और उनकी देरी पर रियल टाइम में नजर रखने की सुविधा देगा।

विजयवाड़ा मंडल की जनसंपर्क अधिकारी (PRO) नुसरत एम. मंद्रूपकर के अनुसार, यह मोबाइल ऐप रेलवे अधिकारियों और कंट्रोलरों को कहीं से भी आसानी से ट्रेनों की आवाजाही की निगरानी करने में सक्षम बनाएगा।

उन्होंने बताया कि इस ऐप के आने से अब अधिकारियों को डेस्कटॉप आधारित सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही, यह ट्रेडिशनल ICMS वेब पोर्टल की उन लिमिटेशंस को भी दूर करेगा जिनमें कई स्क्रीन पर जाना पड़ता था और बार-बार ओटीपी (OTP) के जरिए लॉगिन करना पड़ता था।

कैसे काम करता है ‘Punctuality BZA’ मोबाइल ऐप

साउथ कोस्ट रेलवे के अनुसार, यह नया मोबाइल ऐप सभी महत्वपूर्ण ऑपरेशनल जानकारियों को एक सिंगल और यूजर-फ्रेंडली डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराता है। इसके जरिए अधिकारियों को सेक्शन-वाइज ट्रेनों की स्थिति, लेट ट्रेन मॉनिटरिंग (LTM), पंक्चुअलिटी असेसमेंट मॉड्यूल (PAM) के आंकड़े, खोई हुई ट्रेनों (Lost Train) की पहचान और 15 मिनट से ज्यादा की देरी होने पर ऑटोमेटेड अलर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

रेलवे अधिकारी ने कहा, ”रियल-टाइम मॉनिटरिंग की यह सुविधा परिचालन की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी जिससे अधिकारियों को तेजी से फैसले लेने और ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में सुधार के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाने में आसानी होगी।”

नए पंक्चुअली BZA ऐप को लेट ट्रेन मॉनिटरिंग (LTM BZA) सिस्टम के साथ भी इंटिग्रेट किया गया है। यह रेलवे का एक इन-हाउस टूल है जो ट्रेन मैनेजरों के लिए ट्रेन संचालन से जुड़े दस्तावेज़ों को स्वतः तैयार करता है। इससे रेलवे अधिकारियों को ट्रेनों की देरी और उनकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी रियल-टाइम में मिल सकेगी जिससे वे परिचालन संबंधी समस्याओं पर पहले से ज्यादा तेजी से कार्रवाई कर सकेंगे।

विजयवाड़ा मंडल के डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) मोहित सोनाकिया ने एक बयान में कहा कि यह ऐप रेलवे अधिकारियों को रियल-टाइम ऑपरेशनल संबंधी डेटा उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने कहा, ”इससे अधिकारियों को समय रहते जरूरी हस्तक्षेप करने और आंकड़ों के आधार पर तेजी से फैसला लेने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, फील्ड स्टाफ सुरक्षा और यात्रियों को बेहतर सर्विसेज देने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेगा।”

चलती ट्रेन में अफवाहों से पैदा हुए डर का असली जिम्मेदार कौन? 

मध्य प्रदेश में मुरैना रेलवे स्टेशन के निकट हुए हादसे में चार यात्रियों की मौत से रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बार-बार होने वाले इस तरह के हादसे रेलवे बोर्ड के उन दावों की सच्चाई को सामने लाते हैं, जिनमें रेलगाड़ी के सफर को पूरी तरह सुरक्षित बनाए जाने की बात कही जाती है। सवाल है कि अगर चलती ट्रेन में किसी तरह की अफवाह से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों पर ध्यान न दिया जाए, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?