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Indian Railway: 54 हजार मैंग्रोव वनों को प्रभावित करेगी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, नहीं कटेगा कोई पेड़

इस परियोजना के तहत ‘‘कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में बाढ़ आने की कोई आशंका नहीं होगी। परियोजना के खंभे ऊंचे होंगे और इसलिए पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा।’’

(बुलेट ट्रेन) परियोजना के चलते 13.36 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले करीब 54,000 मैंग्रोव वन प्रभावित होंगे।

Indian Railway: मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन) परियोजना के चलते 13.36 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले करीब 54,000 मैंग्रोव वन प्रभावित होंगे। राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने सोमवार (24 June) को यह जानकारी दी। वह राज्य विधान परिषद में शिवसेना की पार्षद मनीषा कायंदे के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में बाढ़ आने की कोई आशंका नहीं होगी। परियोजना के खंभे ऊंचे होंगे और इसलिए पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा।’’

रावते ने कहा कि राज्य सरकार ने इस कई अरब डॉलर की परियोजना के लिए काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ के स्थान पर पांच पौधे लगाने का प्रस्ताव दिया है। रावते ने अपने लिखित उत्तर में कहा, ‘‘मेरी जानकारी के मुताबिक किसान उचित मुआवजे के लिए अपनी जमीन देने के इच्छुक हैं।’’ इस परियोजना में एक लाख करोड़ रुपये से ऊपर की लागत आने का अनुमान है। इसके लिए निधि जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) उपलब्ध कराएगी।

कैसे होते हैं मैंग्रोव वन 

ये वो पेड़- पौधे होते हैं, जो खारे पानी में तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये उष्णकटिबन्धीय और उपोष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में मिलते हैं। मैंग्रोव पेड़ों की की करीब 80 प्रकार की प्रजातियां होती हैं। ये सभी पेड़ कम ऑक्सीजन वाली मिट्टी वाले क्षेत्रों में उगते हैं, जहां धीमी गति से चलने वाले पानी ठीक दलदल में इनकी तलछट को जमा हो सके। ऐसे वन अक्सर समुद्री इलाकों में पाए जाते हैं। भारत में इस तरह के वन केरल, अहमदाबाद, गोवा, मुम्बई के तटीय इलाकों में देखे जा सकते हैं। इन्हें भूमि के ऊपर उगने वाली प्राकृतिक संपत्ति भी कहा जाता है।

भाषा के इनपुट के साथ।

 

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