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ट्रॉली सर्विस से लेकर ऑटोमैटिक डोर वाले टॉयलेट, आज से चलेगी स्वर्ण ट्रेन, जानें और क्या है खासियत

Indian Railway, IRCTC Gold Train Swarn Project: इस खास प्रोजेक्ट के तहत रेल मंत्रालय यात्रियों का सफर और भी ज्यादा आरामदायक और मनोरंजक बना रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो

सोमवार को ‘स्वर्ण ट्रेन’ (गोल्ड स्टैंडर्ड) से पर्दा उठने जा रहा है। नई दिल्ली-काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस पहली ट्रेन होगी जो स्वर्ण प्रोजेक्ट के तहत चलेगी। स्वर्ण प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों का नवीनीकरण किया जा रहा है। इस खास प्रोजेक्ट के तहत रेल मंत्रालय यात्रियों का सफर और भी ज्यादा आरामदायक और मनोरंजक बना रहा है। यात्रा के दौरान यात्रियों के मनोरंजन पर खासा ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही खाने की व्यवस्था को लेकर काफी काम किया गया है।

‘स्वर्ण ट्रेन’ में कैटरिंग के लिए ट्रॉली सिस्टम की व्यवस्था की गई है। साथ ही साफ और हाईटेक टॉयलेट बनाए गए हैं, ये टॉयलेट्स ऑटोमेटिक दरवाजों की सुविधा से लेस हैं। इसके अलावा टॉयलेट्स में डस्टबिन की सुविधा भी दी गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे भी ट्रेन में लगाए गए हैं और आरपीएफ जवानों की भी व्यवस्था की गई है। ट्रेन को अंदर से सुंदर बनाने के लिए खास तरह की कोटिंग की गई है। ट्रेन की सीटों पर भी खासा ध्यान देते हुए इन्हें और भी आरामदायक बनाया गया है। इतना ही नहीं इंटरनेट के लिए वाई-फाई की सुविधा भी यात्रियों को दी जा रही है।

फिलहाल इस प्रोजेक्ट के तहत 30 ट्रेनों का नवीनीकरण किया जा रहा है, इनमें 15 राजधानी और 15 शताब्दी ट्रेनें शामिल हैं। 25 करोड़ रुपए के बजय वाले इस प्रोजेक्ट को सुरेश प्रभु के कार्यकाल में लॉन्च किया गया था। इसके तहत हर ट्रेन में करीब-करीब 50 का खर्च आ रहा है। काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस के नवीनीकरण के दौरान सुंदरता, स्वच्छता और मनोरंजन पर खासा ध्यान दिया गया है। एक सीनियर रेल अधिकारी का कहना है कि ये भारतीय रेल के स्वर्ण प्रोजेक्ट की पहली ट्रेन होगी, लोगों से अपील है कि इसे सफल बनाने में सहायता करें।

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