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चुनाव पर नजर: रेलवे ने मान लीं सांसदों की मांगें, ट्रेनों के 500 से ज्‍यादा स्‍टॉप को दी मंजूरी

पिछले काफी समय से विभिन्न सांसदों और सहयोगी पार्टी के नेताओं द्वारा लोकप्रिय मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के उनके लोकसभा क्षेत्रों में स्टॉपेज बनाए जाने की मांग की जा रही थी। जिसे अब सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है।

केन्द्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल। (PTI Photo)

2019 लोकसभा चुनावों का ऐलान जल्द ही होने वाला है। ऐसे में विभिन्न सांसद जनता से जुड़े कामों को पूरा करने में विशेष रुचि ले रहे हैं। इसी बीच खबर आयी है कि रेलवे मंत्रालय ने विभिन्न सांसदों की मांगों को मानते हुए उनके लोकसभा क्षेत्रों में ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मंत्रालय ने इस साल करीब 500 नए स्टॉपेज को अपनी मंजूरी दी है। इसके साथ ही मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश में एक नया रेलवे जोन बनाने को भी अपनी मंजूरी दे दी है। खास बात ये है कि इन स्टॉपेज में से अधिकतर को मंजूरी बीते 3 माह के दौरान ही दी गई है। बीते सालों से तुलना करें तो सरकार ने साल 2017-18 में ट्रेनों के 154 नए स्टॉपेज को मंजूरी दी थी। ऐसे में ट्रेनों के स्टॉपेज में इतनी बढ़ोत्तरी को आगामी आम चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है!

बता दें कि पिछले काफी समय से विभिन्न सांसदों और सहयोगी पार्टी के नेताओं द्वारा लोकप्रिय मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के उनके लोकसभा क्षेत्रों में स्टॉपेज बनाए जाने की मांग की जा रही थी। जिसे अब सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इसमें उल्लेखनीय तेजी आयी है। उल्लेखनीय है कि रेलवे की गणना के अनुसार, लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए एक स्टॉपेज बनाने में रेलवे का 12,716 से लेकर 24,506 के करीब पैसा खर्च होता है, जो कि कई फैक्टर्स के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इस स्थिति में रेलवे को नए स्टॉपेज से उतनी कमाई भी होनी चाहिए, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि रेलवे को ऐसे कई स्टॉपेज से कोई खास फायदा नहीं हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक साल 2014 की एक गणना के अनुसार, रेलवे को गैरजरूरी स्टॉपेज के कारण हर दिन करीब 1 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि जिन नए स्टॉपेज को सरकार ने अपनी मंजूरी दी है, उनमें से अधिकतर व्यस्त रेलमार्गों पर हैं, जिससे इन रेलमार्गों पर परिचालन में और मुश्किल आ सकती है। साल 2014 में सरकार ने देशभर में करीब 1200 गैरजरुरी स्टॉपेज को बंद करने की कोशिश की थी, लेकिन राजनीतिक रुप से समर्थन ना मिलने के कारण सरकार ऐसा नहीं कर सकी।

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