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प्यार में पड़कर पाकिस्तान गया था युवक! 6 साल जेल में काटे, अब लौटेगा घर

पाकिस्तान की जेल से छह साल बाद छूटा भारतीय कैदी हामिद निहाल अंसारी मंगलवार को वाघा बॉर्डर के रास्ते स्वदेश पहुंचेगा। सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारी निहाल अंसारी को भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के सुपुर्द करेंगे।

चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पाकिस्तान की जेल से छह साल बाद छूटा भारतीय कैदी हामिद निहाल अंसारी मंगलवार को वाघा बॉर्डर के रास्ते स्वदेश पहुंचेगा। सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारी निहाल अंसारी को भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के सुपुर्द करेंगे। 33 वर्षीय मुंबई निवासी अंसारी एक पाकिस्तानी लड़की के प्रेम में पड़कर वह अफगानिस्तान के रास्ते खैबर पख्तुनख्वाह गया, जहां उसे पकड़ लिया गया। उसके खिलाफ फर्जी दस्तावेज के जरिए जासूसी के इरादे से पाकिस्तान में घुसने का आरोप लगाकर सैन्य अदालत ने तीन साल जेल की सजा सुना दी थी। अंसारी के पास मैनेजमेंट साइंस की डिग्री है और उसके परिवार के मुताबिक पाकिस्तान जाकर लापता करार दिए जाने और फिर गिरफ्तारी का एलान होने से चंद दिन पहले ही उसने मुंबई के कॉलेज में प्रवक्ता की नौकरी शुरू की थी। निहाल अंसारी की मां फौजिया अंसारी मुंबई में हिंदी की प्रोफेसर हैं और एक कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल हैं। उसके पिता निहाल अंसारी बैंकर हैं। बड़े भाई डेंटिस्ट हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने निहाल से मुलाकात के लिए 95 बार पाकिस्तानी अधिकारियों को लिखा। हर बार यह पेशकश ठुकरा दी गई।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, हामिद अंसारी के फेसबुक पर कोहाट इलाके की एक लड़की से दोस्ती हुई थी और वह उसी से मिलने पाकिस्तान जाने बाकी पेज 8 पर की तैयारी कर रहा था। हामिद ने कई बार पाकिस्तान जाने की कोशिश की, लेकिन वीजा नहीं मिल सका था। इसके बाद उसने कोहाट के स्थानीय लोगों से फेसबुक पर संपर्क किया। चार नवंबर 2012 को हामिद अंसारी ने मुंबई से काबुल के लिए उड़ान पकड़ी। उसने अपने परिजनों को बताया था कि एक उड्डयन कंपनी में इंटरव्यू देना है। वह 15 नवंबर को घर लौटने वाला था। लेकिन काबुल पहुंचने के कुछ दिन बाद घर वालों से उसका संपर्क टूट गया।

भारत की ओर से पाकिस्तान को दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक, हामिद अंसारी काबुल से जलालाबाद पहुंचा और वहां से यात्रा के दस्तावेज और पासपोर्ट के बिना तोरखम के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुआ। वह कुर्क में रुका और कोहाट पहुंचा। कोहाट के होटल में कमरा लेने के लिए उसने हमजा नाम के जाली पहचान पत्र इस्तेमाल किया और उसी दिन पुलिस ने शक की बुनियाद पर उसने हिरासत में ले लिया। परिजनों का कहना है कि जब हामिद अंसारी से बात नहीं हुई, तो उन्होंने लैपटॉप देखा और ईमेल- फेसबुक पर होने वाली बातचीत पढ़ी। परिवार वालों के मुताबिक फेसबुक की बातचीत से पता चला कि वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के कोहाट इलाके की किसी लड़की से बात करता था और उसी से मिलने के लिए वहां जाना चाहता था।

इसके बाद परिवार वालों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा और फिर पता लगा कि वह पाकिस्तान में पकड़ा गया है और उसके खिलाफ जासूसी का आरोप लगाया गया है। पाकिस्तान की खुफिया एजंसियों व कोहाट की स्थानीय पुलिस द्वारा 2012 में हिरासत में लिए जाने के बाद से अंसारी लापता हो गया था और आखिरकार उसकी मां फौजिया अंसारी द्वारा दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जवाब में हाई कोर्ट को सूचित किया गया कि वह पाकिस्तानी सेना की हिरासत में हैं और एक सैन्य अदालत में उस पर मुकदमा चलाया जा रहा है।

पाकिस्तान की खुफिया एजंसी आइएसआइ ने अंसारी को 2012 में पकड़ा था और 2015 में एक सैन्य अदालत ने उसे फर्जी पाकिस्तानी पहचान पत्र रखने के मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी। 15 दिसंबर, 2015 को सजा सुनाए जाने के बाद से वह पेशावर केंद्रीय कारागार में बंद था। उसकी तीन साल की सजा 15 दिसंबर, 2018 को पूरी हो गई थी, लेकिन कानूनी दस्तावेज तैयार नहीं होने से वह भारत रवाना नहीं हो पा रहा था।

गुरुवार को पेशावर हाई कोर्ट ने संघीय सरकार को एक महीने के भीतर उसे स्वदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा कि अंसारी को उसकी सजा पूरी होने के बाद रिहा किया गया और भारत भेजा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंसारी एक भारतीय जासूस था जिसने अवैध तरीके से पाकिस्तान में प्रवेश किया था और वह राष्ट्र विरोधी अपराधों व फर्जी दस्तावेज बनाने में शामिल था।

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