पाक जेल में मारे गए किरपाल सिंह का शव पहुंचा भारत, फूट-फूट कर रोई बहन - Jansatta
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पाक जेल में मारे गए किरपाल सिंह का शव पहुंचा भारत, फूट-फूट कर रोई बहन

किरपाल पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाले थे। कहा जाता है कि लाहौर हाईकोर्ट ने उसे बम विस्फोटों के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन उसकी मौत की सजा अज्ञात कारणों से कम नहीं की जा सकी।

Author नई दिल्ली | April 19, 2016 6:32 PM
भारत लाया गया किरपाल सिंह का शव। (pic source- ani twitter account)

जासूसी के आरोप में लाहौर की कोट लखपत जेल में 20 साल से अधिक समय काटने वाले भारतीय कैदी किरपाल सिंह का शव मंगलवार को भारत पहुंच गया। किरपाल सिंह का शव वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लाया गया। पचास वर्षीय किरपाल सिंह 1992 में कथित तौर पर वाघा सीमा से पाकिस्तान में घुसे थे जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में उन्हें पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बम विस्फोटों के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। 11 अप्रैल को किरपाल सिंह की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पाकिस्तान सरकार का कहना था कि किरपाल सिंह की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है।

किरपाल सिंह के शव को पोस्ट मार्टम के लिए हॉस्पिटल भेज दिया गया है। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही उनकी मौत की सही वजह सामने आ पाएगी। जिसके बाद उनके शव का अंतिम संस्कार किया जायेगा।

कोट लखपत जेल के एक अधिकारी ने किरपाल की मौत पर कहा था,” किरपाल सिंह को कोट लखपत जेल में मृत पाया गया। किरपाल का शव पोस्टमॉर्टम के लिए जिन्ना अस्पताल भेजा गया है। अधिकारी ने कहा कि एक न्यायिक अधिकारी को भी बुलाया गया जिसने कुछ कैदियों के बयान दर्ज किए। यातना से किरपाल की मौत के सवाल पर उन्होंने कहा, जेल में किरपाल के पास मौजूद कैदियों ने बताया कि उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की और तुरंत उनकी मौत हो गई।” किरपाल सिंह की बहन जागीन कौर भाई के शव को देखकर खुद को रोक ना सकीं और भावुक हो गईं।

Family members of Kirpal Singh (who died in Pak jail) mourn as latter’s body is brought to a hospital in Amritsar pic.twitter.com/ABMdRzdh9v

किरपाल पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाले थे। कहा जाता है कि लाहौर हाईकोर्ट ने उसे बम विस्फोटों के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन उसकी मौत की सजा अज्ञात कारणों से कम नहीं की जा सकी। उसकी बहन जगीर कौर ने कहा था कि उनका परिवार आर्थिक तंगी की वजह से उनकी रिहाई की आवाज नहीं उठा सका तथा उनके मामले को उठाने के लिए कोई नेता आगे नहीं आया। गौरतलब है कि इससे पहले सरबजीत की मौत भी पाकिस्तान की जेल में हुई थी।

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