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इन पांच कारणों से अहम है पीएम नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (चार जुलाई) को इजराइल की तीन दिवसीय (4-6 जून) यात्रा पर रवाना हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Source: PTI)

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (चार जुलाई) को इजराइल और जर्मनी की तीन दिवसीय (4-6 जून) यात्रा पर रवाना हुए। पीएम मोदी यात्रा के पहले दिन इजराइल जाएंगे। यात्रा से एक दिन पहले सोमवार (तीन जुलाई) को भारतीय पीएम ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि वो यात्रा को लेकर काफी आशावान हैं। पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि वो कारोबारी समझौतों के अलावा लोगों से मुलाकात भी करेंगे। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य, कृषि, जल और अंतरिक्ष तकनीक इत्यादि मसलों पर बातचीत और समझौते हो सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि किन पांच कारणों से भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की ये इजराइल यात्रा काफी अहम माना जा रही है।

1- इजराइल जाने वाले पहले भारतीय पीएम- इजराइल के आस्तित्व में आने के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री वहां का दौरा कर रहा है। इजराइल का गठन 1948 में हुआ। 1949 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे  मान्यता दी। 1950 में भारत ने इजराइल को स्वतंत्र देश की मान्यता दी लेकिन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध कई दशकों बाद पीवी नरसिम्हाराव सरकार के समय बने। रक्षा तकनीक, जल संशोधन, कृषि तकनीक इत्यादि में इजराइल अग्रणी देश है। ऐसे में इजराइल से बेहतर संबंध भारत के लिए लाभकारी हैं।

2- वैश्विक राजनीति में नया रुख- भारतीय राजनेता जब भी इजराइल का दौरा करते रहे हैं वो साथ ही फिलीस्तीन भी जाते रहे हैं। भारत सरकार की इजराइल और फिलस्तीन दोनों को बराबर तवज्जो देने की नीति रही है। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच लम्बे समय से जारी टकराव के बीच भारत सरकार की ये कोशिश रहती रही है कि उसे किसी एक का हिमायती न समझा जाए। भारतीय पीएम इस यात्रा में फिलस्तीन नहीं जाएंगे। एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के फिलस्तीन न जाने पर पहले ही सवाल खड़ किया है। यहूदी राष्ट्र इजराइल चारों तरफ से मुस्लिम राष्ट्रों से घिरा हुआ है। वो मुस्लिम देशों की साझा फौज से युद्ध भी लड़ चुका है। ऐसे में इजराइल की तरफ झुकना मुस्लिम विरोधी नीति के तौर पर देखा जा सकता है।

3- रक्षा क्षेत्र में सहयोग- रक्षा तकनीक में इजराइल दुनिया के सबसे अग्रणी देशों में एक है। भारत द्वारा साल 2012 से 2016 के बीच खरीदे गए 41 प्रतिशत हथियार इजराइल से खरीदे गए थे। अमेरिका और रूस के बाद इजराइल भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। इजराइल 1962 के चीन युद्ध, 1965 और 1971 के पाकिस्तान युद्ध में भी इजराइल ने मदद की थी। अप्रैल 2017 में भारत और इजराइल के बीच 12 हजार करोड़ रुपये का रक्षा सौदा हुआ।

4- कृषि क्षेत्र में समझौते- भारत आज भी एक कृषि प्रधान देश है। देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी खेती से जुड़ी हुई है। इजराइल कृषि तकनीक में काफी आगे है। भारत इजराइल के साथ मिलकर 2015-18 का एक्शन प्लान पर काम कर रहा है। भारत में बनाए जा रहे 26 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में से 15 इजराइल के सहयोग से विकसित किया जा रहे हैं। हरियाणा में पहले ही इजराइल की मदद से एक कृषि फॉर्म में 65 प्रतिशत कम पानी खर्च करके उपज 10 गुना बढ़ाने में सफलता हासिल की।

5- जल प्रबंधन क्षेत्र में सहयोग- जल प्रबंधन पूरी दुनिया के लिए समस्या बना हुआ है। 125 करोड़ से ज्यादा आबादी वाली कृषि प्रधान देश में पीने और  सिंचाई दोनों के लिए पानी की जरूरत हमेशा बनी रहती है। जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजराइल काफी विकसित है इसलिए इस क्षेत्र में वो भारत के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे में जल प्रबंधन से जुड़े समझौते होने की पूरी उम्मीद है। 28 जून 2017 को केंद्रीय कैबिनेट ने इजराइल के साथ “नेशनल कैंपेन फॉर वाटर कंजरवेशन इन इंडिया” पर परस्पर सहयोग पत्र (एमओयू) को मंजूरी दी। साल 2016-17 में दोनों देशों के बीच 33 हजार करोड़ रुपये का परस्पर कारोबार हुआ। उम्मीद है कि पीएम मोदी के दौरे में ये कारोबार और बढ़ेगा।



भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी का हिन्दी में स्वागत करता इजराइली-

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