भारतीय नौसेना ने हाल के कुछ दिनों में अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र के पास अपने लगभग आधा दर्जन से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं। इन युद्धपोतों को इस तरह लगाया गया है कि वे भारत के लिए ईंधन लेकर आ रहे टैंकर जहाजों को सुरक्षित तरीके से रास्ता पार करा सकें और उन्हें किसी भी खतरे से बचाया जा सके। यह कदम पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और बदलती स्थिति को देखते हुए लिया गया है। नौसेना का यह विशेष टास्क फोर्स जरूरत के अनुसार बढ़ाया या घटाया जा रहा है, यानी जैसे-जैसे स्थिति बदलती है, वैसे-वैसे जहाजों की संख्या और उनकी तैनाती भी बदली जाती है।
पहले भी भारतीय नौसेना ने दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा की थी। ये टैंकर थे बहुत बड़े गैस वाहक जहाज (VLGC) “शिवालिक” और “नंदा देवी”। इन जहाजों को उस समय सुरक्षित तरीके से आगे ले जाया गया जब ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अवरोध की स्थिति पैदा हो गई थी। यह स्थिति पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच बनी थी, जिससे समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया था।
इसके बाद सोमवार को भी भारतीय नौसेना को दो और भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा का काम दिया गया। ये जहाज “पाइन गैस” और “जग वसंत” थे। दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर रहे थे। जहाजों की ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर तक ये दोनों टैंकर ईरान के लारक (Larak) और क़ेश्म (Qeshm) द्वीपों के बीच के समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच रहे थे।
नौसेना इस पूरे क्षेत्र में मौजूद अपने युद्धपोतों को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग टैंकरों के साथ जोड़कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। जो भी युद्धपोत उस समय उस क्षेत्र के पास होते हैं, उन्हें तुरंत संबंधित टैंकर की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है ताकि वह सुरक्षित तरीके से जलडमरूमध्य पार कर सके।
इसके अलावा, युद्धपोतों को इस क्षेत्र तक पहुंचने में उनके पिछले स्थान के अनुसार समय लगता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई जहाज कुवैत से रवाना होता है, तो उसे होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंचने में लगभग डेढ़ दिन का समय लगता है। इसके बाद वहां पहुंचकर वह टैंकर की सुरक्षा में शामिल हो जाता है।
भारतीय व्यापारी जहाज लगातार नौसेना के संपर्क में रहते हैं। नौसेना उनकी स्थिति और मूवमेंट पर लगातार नजर रखती है और हर समय उनकी निगरानी करती रहती है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। जैसे ही “जग वसंत” और “पाइन गैस” होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लेंगे, उसके बाद भी लगभग 20 भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में मौजूद रहेंगे और अपनी यात्रा जारी रखेंगे।
यह भी पढ़ें: क्या पाकिस्तान में होगी अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध पर बैठक? आसिम मुनीर ने की ट्रंप से बात
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान पाकिस्तान प्रयास कर रहा है कि वह इन देशों के बीच समझौता कराने वाला मुख्य मध्यस्थ बन जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और हालात पर चर्चा की।बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने बातचीत के लिए इस्लामाबाद को एक संभावित जगह के रूप में पेश किया है, जहां इस हफ्ते ही ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और ईरान के प्रतिनिधि आमने-सामने आ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
