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फंड कटौती से आर्थिक तंगी झेल रही नौसेना! बजट अनुमान से 23 हजार करोड़ रुपये कम मिले; घटानी पड़ी हथियारों की खरीदारी

नौसेना ने खतरे की जल्द चेतावनी देने वाले 10 Kamov KA 31 हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बनायी थी, जबकि अब नौसेना को इसमें कटौती कर 6 Kamov हेलीकॉप्टर ही मिलेंगे। इस सौदे की कीमत करीब 3600 करोड़ रुपए थी, जिसमें अब कटौती की गई है।

भारतीय नौसेना अध्यक्ष (मध्य में) (PTI Photo)

भारतीय नौसेना फंड में कटौती की समस्या से जूझ रही है। दरअसल फंड में कटौती के चलते नौसेना को लड़ाकू हथियारों और तकनीक की खरीद में भारी कमी करनी पड़ी है। भारतीय नौसेना ने हथियारों की खरीद को सीमित किया है और इस योजना को जल्द ही भारतीय रक्षा मंत्रालय से भी मंजूरी मिलने की संभावना है।

बता दें कि बीते बजट में नौसेना को 41,259 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, जबकि नौसेना को हथियारों और तकनीक की खरीद को देखते हुए करीब 64,307 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी।

इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों के हवाला से बताया गया है कि नौसेना ने बजट में कटौती के बाद Mine Counter Measure Vessels (MCMVs) की खरीद में कटौती की है। पहले नौसेना 12 MCMVs खरीदने की योजना बना रही थी, जबकि अब उसे 8 से ही काम चलाना पड़ेगा।

इसी तरह नौसेना ने खतरे की जल्द चेतावनी देने वाले 10 Kamov KA 31 हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बनायी थी, जबकि अब नौसेना को इसमें कटौती कर 6 Kamov हेलीकॉप्टर ही मिलेंगे। इस सौदे की कीमत करीब 3600 करोड़ रुपए थी, जिसमें अब कटौती की गई है।

इनके अलावा इंडियन नेवी ने P8 की खरीद भी 10 की बजाय 6 तक सीमित रखने का फैसला किया है। इस सौदे की कीमत करीब 21,000 करोड़ थी, अब इसमें भी कटौती का फैसला किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, नौसेना के फंड में कटौती का असर मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है। दरअसल नौसेना मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत बनाए जा रहे 4 लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स का निर्माण करने जा रही थी, लेकिन अब नौसेना को इस प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींचने पड़े हैं।

इसके अलावा मेक इन इंडिया के तहत ही देश के सबसे बड़े वारशिप को बनाने की भी योजना थी, लेकिन साल 2018 में रक्षा मंत्रालय ने इसकी प्रक्रिया को रोक दिया था। बीते दिनों ही भारतीय नौसेना ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी को बताया था कि बजट में कटौती के चलते नौसेना को आधुनिक बनाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।

नौसेना पहले ही एयरक्राफ्ट करियर्स, माइन काउंटर मीजर वेसेल्स, लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स और फ्लीट सपोर्ट शिप की कमी से जूझ रही है। नौसेना की साल 2027 तक 200 वारशिप फोर्स बनाने की योजना थी, जिसे अब बजट में कमी के चलते घटाकर 175 किया गया है।

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