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तालिबान, इस्लामिक स्टेट और बोको हराम के बाद माओवादी दुनिया के चौथे सबसे खतरनाक संगठन

आतंकी हमलों के मामले में भारत पूरी दुनिया में इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बाद चौथे स्थान पर है।

Author Updated: September 16, 2016 8:11 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।

साल 2015 में पूरी दुनिया में 11774 आतंकी हमले हुए थे जिनमें 28,328 लोग मारे गए थे और 35,320 लोग घायल हुए थे। आतंकी हमलों की संख्या के मामले में भारत इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बाद दुनिया में चौथे स्थान पर है। भारत में पिछले साल कुल 791 आतंकी हमले हुए जिनमें से 43 प्रतिशत हमले आतंकी हमलों नक्सलवादियों ने किए। नक्सल हमलों में 289 भारतीय मारे गए। अमेरिका के “नेशनल कॉन्सॉर्शियम फॉर द स्टडी ऑफ टेररइज्म एंड रिस्पॉन्स टू टेररइज्म” के रिपोर्ट के अनुसार तालिबान, इस्लामिक स्टेट और बोको हराम दुनिया के तीन सबसे खतरनाक आतंकी संगठन हैं। चौथे स्थान पर भारत में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) है। सीपीआई (माओवादी) को 2015 में 343 आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार माना गया जिनमें 176 लोग मारे गए।

पिछले साल तालिबान ने 1093 आतंकी हमले किए जिनमें 4512 लोग मारे गए। इस्लामिक स्टेट ने पिछले साल 931 हमले किए जिनमें 6050 लोग मारे गए। वहीं बोरो हराम ने 491 आतंकी हमले करके 5450 लोगों की जान ले ली। खतरनाक आतंकी संगठनों की सूची में पांचवे स्थान पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) है जिसने 2015 में 238 आतंकी हमले करके 287 लोगों की जान ली।

भारत में हुए आधे से अधिक आतंकी हमले चार राज्यों छत्तीसगढ़ (21 प्रतिशत), मणिपुर (12 प्रतिशत), जम्मू-कश्मीर (11 प्रतिशत) और झारखंड (10 प्रतिशत) हुए। छत्तीसगढ़ माओवादी हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। राज्य में पिछले साल आतंकी हमलों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। 2014 में छत्तीसगढ़ में 76 हमले हुए थे जबकि 2015 में इनकी संख्या 167 हो गई। रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में 45 उग्रवादी गुट सक्रिय हैं। 2014 में भारत में ऐसा कोई आतंकी हमला नहीं हुआ जिसमें 50 या उससे अधिक लोग मारे गए हों लेकिन 2015 में ऐसे सात हमले हुए और ऐसे सभी हमले माओवादियों ने किए। भारत के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2010 से 2015 तक नक्सल हमलों में 2162 आम नागरिक और 802 सुरक्षा बल मारे गए। मरने वालों में ज्यादातर आदिवासी थे।

रिपोर्ट के अनुसार 2015 में आतंकी और उग्रवादी संगठनों द्वारा अगवा किए गए लोगों की संख्या करीब तीन गुनी हो गई। 2014 में पूरे देश में कुल 305 लोगों का अपहरण हुआ था जबकि 2015 में अगवा किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 862 हो गई। इनमें 707 लोगों को नक्सलवादियों ने अगवा किया था। 2014 में नक्सलवादियों ने 163 लोगों को अगवा किया था।

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