भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) टैंकर फारस की खाड़ी से अब आगे बढ़ रहे है और आज ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ पार कर सकते हैं। ये जहाज एक ऐसे रूट से होकर गुजर रहे हैं जो ईरान के कब्जे वाले जल क्षेत्र से होकर जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान चेकपॉइंट बनाकर जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर सकता है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ये दोनों भारतीय एलपीजी टैंकर पाइन गैस (Pine Gas) और जग वसंत (Jag Vasant) सोमवार दोपहर तक ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के बीच के जल क्षेत्र के करीब पहुंच चुके थे।

दोनों टैंकर एक-दूसरे के करीब चलते हुए आगे बढ़ रहे थे। इन टैंकरों से लगातार यह संकेत दिया जा रहा था कि वे भारतीय जहाज हैं। माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा था ताकि Strait of Hormuz पर नजर रख रही ईरानी अथॉरिटीज के बीच उनकी पहचान और झंडे को लेकर कोई भ्रम न हो। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ एक संकरा समुद्री मार्ग है जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।

भारत-ईरान के बीच बातचीत जारी

भारत पिछले कई दिनों से लगातार ईरान के डिप्लोमैटिक अधिकारियों से संपर्क में है ताकि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ से भारतीय जहाज सुरक्षित गुजर सकें। कुछ दिनों पहले एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी को भी इस समुद्री रास्ते सफलतापूर्वक पार कर भारत आए।

जग वसंत टैंकर का मालिकाना हक मुंबई की ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी (Great Eastern Shipping Company) के पास है। इसका संचालन भी यही कंपनी करती है। इस कंपनी को सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) ने चार्टर किया है। वहीं पाइन गैस का स्वामित्व और संचालन मुंबई की Seven Islands Shipping के पास है और इसे Indian Oil Corporation (IOC) ने चार्टर किया है। वेसल ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, दोनों एलपीजी टैंकरों ने भारत के लिए अपनी यात्रा रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच शुरू की है।

जग वसंत की डेडवेट क्षमता करीब 54,500 टन है जबकि पाइन गैस की क्षमती करीब 58500 टन के आसपास है। डेडवेट का मतलब है कि कोई जहाज कुल कितना वजन ले जा सकता है। इसमें कार्गो, ईंधन, ताजा पानी, बैलास्ट पानी, राशन और क्रू शामिल रहते हैं। इन दो टैंकरों को लेकर अनुमान है कि ये भारत की एक दिन से ज्यादा की (पश्चिम एशिया युद्ध से पहले वाली) एलपीजी खपत के बराबर गैस लेकर आ रहे हैं। बता दें कि अभी युद्ध के चलते आपूर्ति संकट है और देश में एलपीजी किल्लत से लोग परेशान हैं।

एलपीजी आयात पर भारत की निर्भरता

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ के बंद होने से पिछले कई दिनों से भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है क्योंकि देश की अधिकतर ऊर्जा जरूरतों के लिए यह एक जरूरी रूट है। भारत का करीब 40 प्रतिशत क्रूड ऑयल इंपोर्ट, 50 प्रतिशत से ज्यादा LNG इंपोर्ट और 90 प्रतिशत से ज्यादा LPG इंपोर्ट इस स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं। यही वजह है कि भारत की एलपीजी सप्लाई के लिए यह एक बड़ी चोकपॉइन्ट है। भारत की सालाना एलपीजी खपत 33 मिलियन टन से ज्यादा है जिसमें आयात पर निर्भरता करीब 60 प्रतिशत है। भारत का 90 प्रतिशत एलपीजी आयात पश्चिमी एशिया से होता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के जरिए देश की कुल एलपीजी खपत का लगभग 54% हिस्सा गुजरता है।

अभी 20 भारतीय जहाजों का आना बाकी

रविवार तक फारस की खाड़ी में भारत के 22 व्यापारी जहाज (merchant vessels) फंसे हुए थे जिनमें 611 नाविक सवार हैं। इनमें ज्यादातर तेल और गैस टैंकर शामिल हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर 3.2 लाख टन एलपीजी, 2 लाख टन एलएनजी और 16 लाख टन कच्चा तेल भारत के लिए लदा हुआ है।

जग वसंत और पाइन गैस के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पार करने के बाद फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की संख्या घटकर 20 रह जाएगी।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत विभिन्न सरकारों के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क में है और यह सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है कि भारतीय जहाज सुरक्षित और बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकें ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान की नाकेबंदी

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर प्रभावी नाकेबंदी कर रखी है लेकिन ऐसे संकेत हैं कि तेहान कुछ जहाजों को चुनिंदा तरीके से गुजरने की अनुमति दे रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और वेसल ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यह अनुमति विभिन्न सरकारों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के आधार पर तय किए गए सुरक्षित मार्ग (Safe Passages) के जरिए दी जा रही है।

हाल ही में कुछ जहाजों द्वारा ईरान के क्षेत्रीय जल से होकर अपनाए गए असामान्य रूट इस बात का संकेत हैं कि तेहरान इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहा है। Strait of Hormuz से दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

पिछले कुछ दिनों में फारस की खाड़ी से बाहर निकलने में सफल रहे कई जहाज सीधे रास्ते के बजाय लंबा और घुमावदार रास्ता अपनाते हुए निकले हैं। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ये जहाज क़ेश्म द्वीप (लारक के पूर्व में) और लारक द्वीप के बीच के जल क्षेत्र से होकर गुजरे।

लंबे रास्ते अपना रहे जहाज

आमतौर पर जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बीच से सीधे और छोटे रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में वे अधिक सुरक्षित समझे जाने वाले इस वैकल्पिक और लंबा रास्ता अपना रहे हैं।

जग वसंत और पाइन गैस के भी इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल करने की उम्मीद है। अनुमान है कि नंदा देवी और शिवालिक ने भी यही रास्ता अपनाया। पाकिस्तान, तुर्क और ग्रीस समेत दूसरे देशों के जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे। पर्यवेक्षकों के अनुसार, ईरान के क्षेत्रीय जल से होकर इस तरह के असामान्य मार्ग अपनाने का मतलब है कि इन जहाजों को फारस की खाड़ी से बाहर निकलने के लिए तेहरान की मंजूरी (nod) मिली हुई थी।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब यूएसए और इजरायल ने ईरान के खिलाफ मिलिट्री एयरस्ट्राइक कर दी। इसी समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रुक गई। ईरान ने दावा किया कि स्ट्रेट सिर्फ यूएस, इजरायल और उनके सहयोगियों के अलावा बाकी सभी के लिए खुला है। लेकिन खबरें आईं कि तटस्थ देशों के भी कुछ जहाजों पर हमला हुआ।

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का आज 24वां दिन है और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर यूएसए के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे वाला अल्टीमेटम आज खत्म हो रहा है। इस डेडलाइन के खत्म होने से पहले ट्रंप ने ‘ताकत के दम पर शांति’ स्थापित करने की बात कही है। ट्रंप के पावर प्लांट पर हमले की धमकी पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर आप पावर प्लांट पर हमला करेंगे तो हम भी आपके पावर प्लांट पर हमला करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…