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वोटर कार्ड से लिंक होगा Aadhar Card, सरकार ने दी इजाजत, पर दुरूपयोग पर भी चेताया

संशोधन में यह भी कहा गया है कि आधार नंबर नहीं देने की स्थिति में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

कानून मंत्रालय ने आधार कार्ड और वोटर कार्ड को लिंक करने की इजाजत दे दी। (फाइल फोटो)

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग के एक अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इसमें वोटर कार्ड को आधार संख्या के साथ जोड़ने के लिए कानूनी शक्तियों के इस्तेमाल की मांग की गई थी। लेकिन इसके साथ ही मंत्रालय ने चुनाव आयोग से डेटा की “चोरी, इंटरसेप्शन और हाईजैकिंक” को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की “गणना” करने को कहा है।

पिछले महीने अपनी प्रतिक्रिया में चुनाव आयोग ने आवेदन और इंफ्रास्ट्रक्टर दोनों स्तरों पर सुरक्षा उपायों की एक विस्तृत सूची भेजी थी। चुनाव आयोग ने कहा था कि मतदाता सूची डेटाबेस सिस्टम आधार इकोसिस्टम में ‘प्रवेश नहीं’ करता है।

पिछले साल अगस्त महीने में लॉ सचिव को लिखे एक पत्र में चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और आधार अधिनियम 2016 में संशोधन के लिए प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव के माध्यम से “बैक-एंड एक्सरसाइज” के रूप में मतदाता सूची की “सफाई” के लिए आधार डेटा संग्रह करने और इसका उपयोग करने की मांग की गई थी।

जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) मतदाताओं की सूची नाम जुड़वाने वालों और पहले से ही सूची में शामिल लोगों से आधार नंबर मांग सकते हैं।

चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि आधार के साथ मतदाता कार्डों की सीडिंग से डुप्लिकेट इंट्री और फर्जी मतदाताओं को बाहर निकालने में मदद मिलेगी और यह राष्ट्र के हित में है। हालांकि, संशोधन में यह भी कहा गया है कि आधार नंबर नहीं देने की स्थिति में किसी का नाम न तो मतदाता सूची से हटाया जाएगा और न हीं उन्हें इनरॉलमेंट देने से रोका जाएगा।

कानून मंत्रालय ने सितंबर महीने में चुनाव आयोग को लिखा कि चुनाव आयोग का तर्क राज्य-प्रायोजित योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए आधार जानकारी इक्ट्ठा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित बेंचमार्क टेस्ट से पास होना होगा। हालांकि, “व्यक्तियों की गोपनीयता की रक्षा” की आवश्यकता पर सुप्रीम कोर्ट के महत्व को देखते हुए चुनाव आयोग को मतदाता सूची डेटा प्लेटफॉर्म में निर्मित सुरक्षा उपायों को सूचीबद्ध करने के लिए कहा गया था।

इसके बाद चुनाव आयोग ने 12 दिसंबर 2019 को फिर से जवाब दिया और लिखा कि उसने मतदाता सूची के डेटा की सुरक्षा के लिए पहले से ही कई ‘सुरक्षा उपाय’ कर रखे हैं। आयोग ने कहा, “आवेदन स्तर पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन एन्क्रिप्शन, https प्रोटोकॉल के माध्यम से एल्गोरिथ्म कम्युनिकेशन, और अप्लीकेशन की लगातार सुरक्षा जांच की जाती है। इलेक्टोरल रोल डेटाबेस सिस्टम आधार इकोसिस्टम में प्रवेश नहीं करता है। इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भी कई तरह के सुरक्षा उपाय किए गए हैं।”

चुनाव आयोग ने सबसे पहले फरवरी 2015 में आधार को मतदाता फोटो पहचान पत्र (या ईपीआईसी) से जोड़ने की कवायद शुरू की थी। उस समय एच एस ब्रह्मा मुख्य चुनाव आयुक्त थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), एलपीजी और केरोसिन वितरण में आधार के इस्तेमाल पर रोक लगाने के की वजह से अगस्त में यह कवायद निलंबित कर दी गई। लेकिन चुनाव आयोग ने इससे पहले पहले ही आधार से 38 करोड़ वोटर कार्ड लिंक कर लिए थे। कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद चुनाव आयोग ने आधार और मतदाता कार्ड को फिर से जोड़ने के लिए कानूनी शक्तियों की मांग की।

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