अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में कहा था कि फ्रांस में डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय ने मांग की थी कि मीडिया के साथ पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे पर आलोचना के बीच सरकार ने अपनी सफाई पेश की है। भारत सरकार द्वारा विदेशी नेताओं से मुलाकात के दौरान ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार का हवाला देते हुए सूत्रों ने कहा कि यह ही वजह थी कि भारत ने इस साल जून में फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनसे मुलाकात के दौरान सतर्कता बरती थी।

यह स्पष्टीकरण अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस सार्वजनिक बयान के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय पक्ष ने दोनों नेताओं की बैठक के बाद अमेरिकी प्रशासन से पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने और कोई सवाल न पूछने का अनुरोध किया था। हालांकि, ट्रंप ने इस अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया और मीडिया के सवालों के जवाब दिए।

नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं पर चर्चा सामान्य

सरकारी सूत्रों ने कहा, “किसी भी वीवीआईपी दौरे से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं पर चर्चा करना सामान्य प्रक्रिया है। इस संबंध में, भारतीय पक्ष ने ऐसे दौरों के लिए अपनी मानक प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर सतर्क रहते हैं, जैसा कि दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ उनकी बातचीत से स्पष्ट होता है। इसलिए, भारत का यह सतर्क दृष्टिकोण है।”

शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा था, “हमारे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच इतनी गहरी और व्यक्तिगत मित्रता होने से मेरे लिए काम बहुत आसान हो जाता है। यह उन चीजों में से एक है जो आपने शायद देखी होगी। मैं दो महीने पहले एवियन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ G7 सम्मेलन में गया था और उन्होंने कैमरे भी लगा दिए थे।”

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच मुलाकात

वह 17 जून को जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई मुलाकात का जिक्र कर रहे थे। इस मुलाकात का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था क्योंकि ट्रंप के इस दावे के बाद कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया था दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी।

गोर ने कार्यक्रम में कहा, “मैं इसे एक किस्से के रूप में साझा करना चाहूंगा। हम पर्दे के पीछे, स्टेज के पीछे थे और एक समय ऐसा आया जब सिर्फ राष्ट्रपति और मैं ही थे। उन्होंने मुझसे पूछा कि भारतीय क्या मुद्दे उठाएंगे। हमने कुछ विषयों पर चर्चा की। फिर उन्होंने पूछा, क्या उनकी कोई मांग है? विदेश मंत्रालय की एक ही मांग थी। उन्होंने कहा कि चलिए मीडिया को बुलाते हैं, पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते, कोई सवाल-जवाब नहीं। तो मैंने राष्ट्रपति से कहा कि भारतीय सवाल-जवाब नहीं चाहते। उन्होंने कहा, कोई बात नहीं।”

अमेरिकी राजदूत ने आगे कहा, “बैठक शुरू हुई, प्रेस अंदर आई। 50 कैमरे थे। राष्ट्रपति यहां बैठे थे, प्रधानमंत्री मोदी वहां। दोनों ने कुछ मिनट बात की। जैसे ही उनकी बात खत्म हुई, राष्ट्रपति ने सबसे पहले कैमरों की ओर देखा और पूछा, कोई सवाल? और इससे सब कुछ खुल गया। फिर उन्होंने 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सब कुछ खुलकर सामने रखा गया। ”

विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

गोर की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा, “अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया कई बातें उजागर करती है। इससे पता चलता है कि मोदी की यह सामान्य प्रथा हो सकती है कि वे विदेशी सरकारों से उन्हें मीडिया के सामने न लाने की गुहार लगाते हैं, वे गुहार लगाते हैं लेकिन वे नहीं सुनते। फिर वे सार्वजनिक रूप से यह जताकर उनका मजाक उड़ाते हैं कि उन्होंने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया और फिर भी वे पलटवार नहीं करते क्योंकि वे समझौता कर चुके हैं।”

खेड़ा ने कहा, “यह सिर्फ नरेंद्र मोदी के बारे में नहीं है। भारत के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और उसका अपमान हो रहा है। और इस स्थिति तक लाने के लिए मोदी निंदा के पात्र हैं।”

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अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार युद्ध लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाली कारों, ट्रकों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर टैरिफ को बढ़ाकर 50 फीसदी करने की धमकी दी है। ट्रंप के मुताबिक, यह नया शुल्क 1 जनवरी 2027 से लागू किया जा सकता है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें