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नियमों को दरकिनार कर फेसबुक से सीधे यूजर्स की जानकारी मांग रही केंद्र सरकार, दो साल में तिगुना हुआ आपातकालीन अनुरोध

फेसबुक की तरफ से जारी ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। कंपनी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की तरफ से आपातकालीन अनुरोध के तहत यूजर्स से जुड़ी सूचनाएं मांगने में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 15, 2019 8:27 AM
फेसबुक से म्युचूअल लीगल असिस्टेंट ट्रीटी के तहत यूजर्स की जानकारी के लिए आग्रह किया जाता है। (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार नियमों को दरकिनार कर फेसबुक से सीधे यूजर्स की जानकारी मांग रही है। सरकार की तरफ से पिछले दो साल में फेसबुक से आपातकालीन अनुरोध के तहत यूजर्स की जानकारी मांगने की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। बृहस्पतिवार को फेसबुक की तरफ से जारी ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

कंपनी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की तरफ से आपातकालीन अनुरोध के तहत यूजर्स से जुड़ी सूचनाएं मांगने में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 के पहले छह महीने में सरकार 1615 लोगों की जानकारी मांग चुकी है।

इससे पहले 2018 के बाद के 6 महीने में 861 लोगों की जानकारी मांगी गई थी। कुल मिलाकर पिछले साल 1478 लोगों की जानकारी के लिए आपातकालीन अनुरोध किया गया। यह साल 2017 के 460 के मुकाबले 3 गुना है। सामान्य रूप से अमेरिकी कंपनी फेसबुक से यूजर्स की जानकारी म्युचूअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तह मांगी जाती है।

इसमें यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस भी शामिल होता है। लेकिन आपातकालीन अनुरोध सीधे फेसबुक से लॉ इन्फोर्समेंट ऑनलाइन रिक्वेस्ट सिस्टम के जरिये मांगी जाती है। फेसबुक की रिपोर्ट के अनुसार इमरजेंसी में लॉ एजेंसी बिना कानूनी प्रक्रिया के अपना अनुरोध भेज सकती हैं।

परिस्थितियों के आधार या संभावित खतरे को देखते हुए पर हम स्वैच्छिक रूप से एजेंसियों के सामने जानकारी रख सकते हैं। जहां हमें लगता है कि ऐसा करना ठीक होगा और इसमें किसी तरह के गंभीर शारीरिक चोट या मौत की बात होती है। साल 2016 में फेसबुक के पास सामान्य नियमों को दरकिनार कर सरकार की तरफ से महज एक फीसदी अनुरोध प्राप्त हुए। अब कुल आग्रह में से आपातकालीन आग्रह करीब 7 फीसदी हो गए हैं।

इस साल सबसे अधिक कंटेंट हटवाने के मामले में भारत छठे स्थान से पाकिस्तान  और मेक्सिको के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गया। रिपोर्ट में कहा गया कि हेट स्पीच, हिंसा को भड़काने वाले धर्म विरोधी कंटेंट, मानहानि, उग्रवाद, सरकार विरोधी और देश
विरोधी मामलों के आरोप में कंटेंट को हटवाया गया।

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