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सीमा पार तीज त्योहार- मोरिसवेल में दिवाली, पटना में करवा चौथ

महज उत्तर भारत के पर्व की पहचान से बंधी दिवाली की रोशनी इस कदर पसरी कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने दिवाली की सार्वजनिक शुभकामना देते हुए इसे पूरी दुनिया में मनाया जाने वाला त्योहार बताया।

Author October 25, 2017 04:07 am
करवाचौथ ( प्रतीकात्मक फोटो)

देश हो या राज्य उसकी पहचान महज नक्शे पर खींची गई लकीरों से नहीं होती, बल्कि वह पहचाना जाता है वहां के लोगों से, उनकी संस्कृति से, उनके संस्कार और सरोकारों से। इस संस्कृति, संस्कार और सरोकार को किसी भी सीमा में बांधा नहीं जा सकता। ये राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय हर सीमा लांघते नजर आते हैं। तभी तो, महज उत्तर भारत के पर्व की पहचान से बंधी दिवाली की रोशनी इस कदर पसरी कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने दिवाली की सार्वजनिक शुभकामना देते हुए इसे पूरी दुनिया में मनाया जाने वाला त्योहार बताया। जब ब्रिटेन की प्रधानमंत्री दिवाली की शुभकामना देती हैं तो अंदाज लगाया जा सकता है कि पूरे ब्रिटेन में दिवाली को लेकर क्या दीवानगी रहती होगी। संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय तो काफी समय पहले से दिवाली पर जगमगाता रहा है।   इसी तरह, पंजाब के करवा चौथ का चांद अब फिल्मों और टीवी के जरिए देश के कई अन्य हिस्सों में भी दिखने लगा है। बिहार-उत्तर प्रदेश के महापर्व छठ की छटा इस कदर पसरी कि अब वह दिल्ली-पंजाब-मुंबई में भी जगह बनाता जा रहा है।

दिवाली की बात ही अलग है
अमेरिका के नार्थ केरोलिना के मोरिसवेल में रहने वालीं भारतीय मूल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर लूना सिंह बताती हैं कि वैसे तो यहां दुर्गापूजा से लेकर पोंगल, ओणम और नवरात्र तक की धूम रहती है, लेकिन दिवाली की बात ही कुछ और है। लूना कहती हैं कि दिवाली पर यहां स्थानीय दुकानों में कपड़ों, मिठाई और पटाखों की सेल लगती है। यहां के स्थानीय उन दुकानों का नजारा जिनमें भारतीय सामान मिलता है, भागलपुर या दिल्ली की दुकानों जैसा ही होता है। लूना कहती हैं कि हमारी कम्युनिटी ‘कैरी’ की दिवाली तो बहुत लोकप्रिय है। उन्होंने कहा कि वैसे तो यहां साल भर पटाखों की कानूनी रूप से बिक्री नहीं होती है, लेकिन दिवाली के समय उसे सीमित मात्रा में खरीदने की इजाजत होती है। लूना ने बताया कि उनके पड़ोसी अमेरिकी हैं इसलिए पटाखे जलाने के पहले उनसे इजाजत ले लेते हैं कि हम बहुत कम आवाज वाले पटाखे जला रहे हैं। वे बताती हैं कि दिवाली के दिन उनके दफ्तर में छुट्टी नहीं होती पर वे इस मौके पर छुट्टी ले लेती हैं और दिवाली के बाद जो पहला रविवार होता है उस दिन वे बड़ी पार्टी करती हैं। वहां रह रहे पड़ोसियों को आमंत्रित करती हैं और खूब आनंदित होती हैं। वे चहकते हुए कहती हैं कि यहां तो ताजमहल की तरह दिवाली भी भारत की पहचान हो गई है।
दक्षिण में भी दिवाली का जलवा

मद्रास यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अन्नपूर्णा चिट्टी कहती हैं कि पहले दिवाली को उत्तर भारत के त्योहार के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब दक्षिण भारत में भी दिवाली का जलवा है। यहां भी उपहार देने और खूब रोशनी का चलन हो गया है। चिट्टी कहती हैं कि तमिलनाडु के ज्यादातर बाजारों पर मारवाड़ी समुदाय का दखल है। इसलिए उत्तर भारत के त्योहारों की यहां खास पहचान बन गई है। अब तो आप चेन्नई में गणपति की पूजा भी धूमधाम से होते देख सकते हैं। वे कहती हैं कि पिछले दो दशकों में त्योहारों का और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बहुत बढ़ा है और निसंदेह इसमें हिंदी फिल्मों का योगदान है। अविभाजित बिहार की रांची से मुंबई पहुंचीं अनीता नेहा खलखो बताती हैं कि आदिवासियों का पर्व करमा भी हम यहां मनाते हैं और अब तो गणपति भी हमारी रगों में बस गए हैं। मैं गणेशोत्सव के दौरान अपने घर में गणेश की प्रतिमा स्थापित करती हूं।

गैरबंगाली महिलाओं का भाया सिंदूरखेला
दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की सेवानिवृत्त प्रोफेसर ब्रतती पांडे कहती हैं कि इन दिनों बंगाल की दुर्गापूजा का आकर्षण भी बहुत बढ़ा है। खास कर अष्टमी आरती और सिन्दूरखेला को गैरबंगाली महिलाएं भी बहुत चाव से खेलती हैं। अब तो दिल्ली में भी बंगाल की शैली की दुर्गा की मूर्ति और पंडाल दिखते हैं। लाल पाढ़ की साड़ी कम उम्र की भी लड़कियां पसंद करने लगी हैं और अष्टमी की पूजा के वक्त उसे पहनती हैं। गाजियाबाद के वैशाली में रहने वाले मनोज द्विवेदी कहते हैं कि हमने अपनी सोसाइटी की दुर्गापूजा के लिए खास तौर से बंगाली पंडित को बुलाया था। एक दो बार उनकी पूजा विधि देख कर हम वैसे ही पूजा करने लगे। इसी तरह पंजाब का करवा चौथ अब बिहार तक पहुंच चुका है। पटना की प्रगति बताती हैं कि वैसे तो हमारे यहां विवाहित महिलाएं तीज करती हैं लेकिन मैं करवा चौथ करती हूं। गाजियाबाद की एक सोसाइटी में रहने वाली मोनिका कहती हैं कि मैं बिहार से हूं लेकिन मेरी सोसाइटी की ज्यादातर महिलाएं करवा चौथ करती हैं तो मैंने भी करना शुरू कर दिया। मुझे यह अब बहुत अच्छा लगता है। अब सूर्योपासना का महापर्व बेहद करीब है। बिहार-यूपी की इस छठ पूजा की आस्था दिल्ली-गुड़गांव-फरीदाबाद में भी देखी जा सकती है। यहां पूजा बाजार सजने लगे हैं। यमुना और हिंडन के किनारे छठ के घाट तैयार होने लगे हैं। इस महापर्व की हलचल आप भी अपने इलाके में महसूस करते होंगे।

 

 

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