भारत और चीन के बीच सबकुछ ठीक नहीं, विदेश मंत्री जयशंकर बोले- सफाई देने की स्थिति में नहीं ड्रैगन

भारत और चीन के बीच बने गतिरोध को लेकर 10 अक्टूबर को 13वें दौर की सैन्य स्तरीय वार्ता हुई।इसके बाद घटनाक्रमों की समीक्षा की गई। इसमें आपसी विवादों के निपटारे के लिए अगले दौर की सैन्‍य स्तरीय वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी।

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केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर(फोटो सोर्स: PTI/फाइल)।

वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बीते करीब डेढ़ साल से भारत और चीन के बीच बने तनाव को देखते हुए दोनों देशों ने अब अगले दौर की सैन्य स्तर पर वार्ता को लेकर सहमति जताई है। बता दें कि यह 14वें दौर की वार्ता होगी। जिसमें संघर्ष वाले इलाके से दोनों देशों की सेनाओं को पीछे हटने पर जोर दिया जाएगा।

वहीं चीन के साथ संबंधों पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के रिश्ते इस समय ‘विशेष रूप से खराब दौर’ से गुजर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख सीमा संघर्ष को लेकर विदेश मंत्री ने कहा, बीजिंग ने समझौतों के उल्लंघन में कई कार्रवाई की है, जिसके लिए उसके पास अभी भी “विश्वसनीय स्पष्टीकरण” नहीं है। ऐसे में चीनी नेतृत्व को जवाब देना है कि वे द्विपक्षीय संबंधों को किस तरफ ले जाना चाहते हैं।

सिंगापुर में विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमिक फोरम’ में ‘ग्रेटर पावर कॉम्पीटीशन: द इमर्जिंग वर्ल्ड ऑर्डर’ के एक पैनल में अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘यह तय है कि चीन विस्तार कर रहा है, लेकिन उसका स्वभाव और उसके बढ़ते प्रभाव का तरीका एकदम अलग है। लेकिन हमारे सामने ऐसी स्थिति नहीं है, जहां चीन अनिवार्य रूप से अमेरिका की जगह ले सके। चीन और अमेरिका के बारे में सोचना स्वाभाविक है।

अमेरिका को लेकर एस जयशंकर ने कहा कि पहले की तुलना में अमेरिका आज कहीं अधिक लचीला भागीदार है। उसके साथ विचारों, सुझावों और कार्य व्यवस्थाओं के लिए अधिक खुलापन देखने को मिला है।

बता दें कि पिछले साल मई में भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध पैदा हुआ था। उस दौरान पैंगोंग झील क्षेत्रों में एक हिंसक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। इस संघर्ष में दोनों पक्षों की तरफ से सीमा पर सैनिकों और हथियारों की तैनाती बढ़ा दी गई थी।

वहीं पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी की हिंसा के बाद पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ता चली लेकिन नतीजा बहुत सुखद नहीं रहा। वहीं अब दोनों तरफ से फिर से वार्ता के जरिए गतिरोध को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

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