राम मंदिर दान विवाद में पता चला है कि पैसों की कथित हेराफेरी सबसे ज्यादा पिछले साल आयोजित हुए महाकुंभ के दौरान देखने को मिली थी। उस समय श्रद्धालुओं की संख्या तो अप्रत्याशित रूप से बढ़ी ही थी, मंदिर को मिलने वाले दान में भी बढ़ोतरी देखने को मिली थी।

अब मंदिर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि औसतन मंदिर में 84 हजार से 1 लाख तक श्रद्धालु आते हैं, लेकिन 45 दिन के महाकुंभ के दौरान यही संख्या 10 से 12 लाख तक पहुंच चुकी थी। इसी वजह से पैसे गिनने वाले काउंटर पर स्टाफ की संख्या बढ़ा दी गई थी।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की मदद करने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई लोगों को काम पर लगाया था। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि 2024 के बाद महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिली थी। उस समय पैसों की गिनती के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत थी। इसी वजह से एक कंपनी के जरिए एसबीआई के लिए लोगों की भर्ती की गई थी। सब कुछ भरोसे के आधार पर चल रहा था।

अधिकारी ने बताया कि उस समय एसबीआई ने सैनिक सिक्योरिटी सर्विस से भी हाथ मिलाया था। सुरक्षा और अतिरिक्त स्टाफ के लिए उनकी सेवाएं ली गई थीं।

गुरुवार को सैनिक सिक्योरिटी सर्विस के डायरेक्टर गौरव सिंह का कहना है कि उनकी एजेंसी हाउसकीपिंग स्टाफ बैंक को उपलब्ध कराती है। अब उस स्टाफ का किस काम में इस्तेमाल हो रहा है, यह बैंक की जिम्मेदारी है।

गौरव सिंह के मुताबिक, राम मंदिर में पैसे गिनने के लिए किसे रखा जाए, इसमें उनकी कंपनी की कोई भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, एसबीआई ने कुछ नाम दिए थे, जिन्हें सिर्फ वेरिफाई किया गया। उनके आधार कार्ड चेक किए गए। इनमें से किसी ने भी पहले उनकी कंपनी के साथ काम नहीं किया था। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि राम मंदिर दान विवाद तब सुर्खियों में आया, जब ट्रस्ट के ही दो लोगों के बीच मतभेद सामने आ गए।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब मंदिर में दान चोरी के आरोप लगे हैं। पहले भी ऐसे आरोप लगे थे, लेकिन उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। शुरुआत में मामले को रफा-दफा करने की भी कोशिश हुई थी। यह कहकर मामला शांत कराने का प्रयास किया गया कि जिसने पैसे लिए हैं, वह उन्हें वापस कर दे।

फिलहाल जांच एजेंसियां पुलिस के साथ-साथ एसबीआई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठा रही हैं। माना जा रहा है कि इतने बड़े स्तर पर कथित दान चोरी केवल एक व्यक्ति या एक स्तर पर संभव नहीं हो सकती।

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