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आईएसआई का तालिबान को निर्देश, भारतीय इंजीनियरों को मत छोड़ो

तालिबान ने पॉवर प्रोजेक्ट के लिए काम कर रहे भारत के सात इंजीनियरों को अगवा कर लिया है। अफगानिस्तान के बगलान में तालिबान के डिप्टी चीफ कारी बख्तियार-ए कुंदुज ने शुरुआत में बंधकों को छोड़ने की बात कही थी, लेकिन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के दबाव के कारण बातचीत की प्रक्रिया थम गई।

अफगानिस्तान में भारतीय इंजीनियर्स को अगवा किया गया (फोटो सोर्स- गूगल मैप)

अफगानिस्तान में अगवा भारतीय इंजीनियरों के मामले में नया मोड़ आ गया है। तालिबान ने गलतफहमी में इनका अपहरण करने और सभी को रिहा करने की बात कही थी। लेकिन, अब खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारतीय इंजीनियरों को न छोड़ने को लेकर तालिबान पर दबाव बनाया है। ‘द क्विंट’ के अनुसार, सभी अगवा भारतीयों को बगलान के पुल-ई खुमरी शहर के डांड-ई शहाबुद्दीन गांव में बंधक बनाकर रखा गया है। इस गांव पर तालिबान का कब्जा है। स्थानीय प्रशासन ने डांड-ई शहाबुद्दीन गांव की बुजुर्गों की समिति और मौलवियों की मध्यस्थता से बगलान क्षेत्र के तालिबान के दूसरे सबसे प्रभावी नेता (डिप्टी चीफ) कारी बख्तियार-ए कुंदुज से बातचीत शुरू कर दी है, ताकि भारतीय इंजीनियरों की सुरक्षित रिहाई सुनश्चित की जा सके।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रविवार (6 मई) को बख्तियार ने गलती से भारतीयों को अगवा और रिहा करने की बात कही थी। लेकिन, व्यापक पैमाने पर मीडिया कवरेज को देखते हुए रिहाई के लिए चली रही बातचीत की प्रक्रिया थम गई। अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय को संदेह है कि तालिबान का बख्तियार गुट आईएसआई के दबाव में काम कर रहा है। अफगान अधिकारी ने बताया कि आईएसआई ने बख्तियार को बातचीत की प्रक्रिया से हटने को लेकर दबाव बनाया था, ताकि उत्तरी अफगानिस्तान में सक्रिय भारतीय पॉवर कंपनियां को बोरिया-बिस्तर समेटने के लिए मजबूर किया जा सके।

सुरक्षा के बिना यात्रा कर रहे थे भारतीय इंजीनियर: इस मामले में गंभीर सुरक्षा चूक की बात सामने आई है। सूत्रों की मानें तो तालिबान आतंकियों ने जब भारतीय इंजीनियरों को अगवा किया था, तब वे बिना किसी सुरक्षा के यात्रा कर रहे थे। तालिबान ने उन्हें किसी तरह का नुकसान न पहुंचाने का आश्वासन दिया था। मालूम हो कि भारतीय इंजीनियर विश्व बैंक की आर्थिक मदद वाली बिजली परियोजना पर काम कर रहे हैं। इसके जरिये मध्य एशिया के बिजली आपूर्तिकर्ताओं को अफगानिस्तान और पाकिस्तान को जोड़ जाना है। भारतीय कंपनी केईसी इंटरनेशनल (आरपीजी की सहायक कंपनी) ने वर्ष 2017 में परियोजना का ठेका हासिल किया था। इसमें एक और भारतीय कंपनी भी शामिल है। केईसी के इंजीनियरों को विशेष तौर पर सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। पाकिस्तान शुरुआत से ही अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी को लेकर आशंकित रहता है। दोनों देशों की लंबी सीमाएं एक-दूसरे से लगती हैं।

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