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रिपोर्ट: शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा देश, यूपी-बिहार में सबसे ज्‍यादा पद खाली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थिति बेहतर

6 राज्यों के पड़ताल में यूपी और बिहार ऐसे राज्य हैं जहां सबसे ज्यादा कुल 4.2 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। हालांकि, इस क्रम में तमिलनाडु और महाराष्ट्र का प्रदर्शन बेहतर है। इन दोनों राज्यों ने अपने यहां तकरीबन 95 फीसदी शिक्षकों की नियुक्ति कर डाली है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

देश में गुणवत्ता प्रधान शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षकों की बेहद जरूरत है। मगर, आंकड़ों पर गौर करें तो भारतीय शिक्षा की हालत यहीं पर पस्त हो जाती है। अच्छे और जरूरत के मुताबिक अध्यापकों की कमी हर राज्यों में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में प्राइमरी स्तर पर तकरीबन 5 लाख अध्यापकों की कमी है, वहीं सेकेंडरी लेवल पर 14 फीसदी ऐसे स्कूल हैं जो न्यूनतम 6 अध्यापकों के पैमाने को पूरा नहीं कर पा रहे। यह जानकारी बच्चों के अधिकारों से जुड़े एक स्वयंसेवी संस्था ने जुटाया है।

सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस अकाउंटबिलिटी (CBGA) और चाइल्ड राइट एंड यू (CRY) नाम की संस्थाओं ने अपने रिसर्च में उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे चिंताजनक हालात को पाया। 6 राज्यों के पड़ताल में यूपी और बिहार ऐसे राज्य हैं जहां सबसे ज्यादा कुल 4.2 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। हालांकि, इस क्रम में तमिलनाडु और महाराष्ट्र का प्रदर्शन बेहतर है। इन दोनों राज्यों ने अपने यहां तकरीबन 95 फीसदी शिक्षकों की नियुक्ति कर डाली है। सूमचे देश में बिहार की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां शुरुआती और हायर सेकेंडरी लेवल दोनो स्तरों पर बिना ट्रेनिंग वाले अध्यापकों की भरमार है। बिहार की तरह ही स्थिति पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के प्राथमिक स्कूलों में 38.7 फीसदी अध्यापक प्रोफेशनली ट्रेंड नहीं हैं। वहीं, सेकेंडरी लेवल पर ऐसे अध्यापकों की संख्या यहां 35.1 फीसदी है। जबकि, पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा प्राथमिक शिक्षा में 31.4 और सेकंडरी लेवल पर 23.9 फीसदी है।

इन संस्थाओं के अध्ययन में पाया गया है कि कई राज्यों में शिक्षा बजट में कमी बेहतर एजुकेशन मुहैया कराने में बड़ी बाधा है। स्कूलों में अच्छे अध्यापकों के अलावा बुनियादी जरूरतों का पूरा अभाव है। कई राज्यों में क्वालिफाइड टीचर नहीं होने के चलते उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट पर अध्यापकों की नियुक्ति कर ली है।

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