पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर! अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39 फीसदी हुई

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई लगातार चौथे महीने दोहरे अंकों में बनी रही। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर ही बनाए रखा था।

तस्वीर का सांकेतिक इस्तेमाल किया गया है। क्रेडिट- एक्सप्रेस आर्काइव

पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का असर महंगाई पर साफ दिखायी दे रहा है। अगस्त में होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) 11.16 से बढ़कर 11.39 हो गया है। हालांकि पिछले महीने के मुताबिक बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस दौरान खाद्य पदार्थों की कीमत में थोड़ी कमी भी दर्ज की गई है। थोक महंगाई दर लगातार पांचवें महीने दहाई के अंक में बनी हुई है। एक महीना पहले जुलाई में यह 11.16 प्रतिशत थी।

बताते चलें कि थोक महंगाई दर या होलसेल प्राइस इंडेक्स का संबंध उन कीमतों से होता है जो कि एक व्यापारी दूसरे से वसूलता है। अगर आम आदमी की बात करें तो उसके द्वारा दी जाने वाली कीमतों के आंकड़े कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स या खुदरा महंगाई दर में होते हैं। इस महीने खुदरा महंगाई दर चार महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “अगस्त 2021 में मुद्रास्फीति के बढ़ने की वजह मुख्य रूप से पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले गैर-खाद्य वस्तुओं, खनिज तेलों; कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस; मूल धातुओं जैसे विनिर्मित उत्पादों; खाद्य उत्पादों; वस्त्रों; रसायनों और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में हुई वृद्धि है।”

खाद्य पदार्थों की यदि बात की जाये तो इस समूह की महंगाई लगातार चौथे महीने कम हुई। जुलाई में शून्य प्रतिशत के मुकाबले अगस्त में यह (-) 1.29 प्रतिशत थी। हालांकि, इस दौरान प्याज और दालों की कीमतों में वृद्धि हुई। प्याज की महंगाई 62.78 प्रतिशत, जबकि दालों की महंगाई 9.41 प्रतिशत बढ़ी। सब्जियों के मामले में इसमें कमी आयी और यह अगस्त में (-) 13.30 प्रतिशत थी।

कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई अगस्त में 40.03 प्रतिशत बढ़ गयी। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई अगस्त में 11.39 प्रतिशत बढ़ी, जबकि जुलाई में यह 11.20 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई लगातार चौथे महीने दोहरे अंकों में बनी रही। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर अपरिवर्तित रखा था। इसने 2021-22 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो इसके पहले के 5.1 प्रतिशत के अनुमान से ज्यादा है।

इससे पहले गत शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई दर अगस्त में घटकर चार महीने के सबसे निचले स्तर 5.3 प्रतिशत पर आ गयी, जो इससे पिछले महीने में 5.59 प्रतिशत थी। यह कमी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट की वजह से हुई।

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