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‘डंवाडोल है भारतीय अर्थव्यवस्था, सुधरने के तुरंत आसार नहीं’, अर्थशास्त्र का नोबेल विजेता बनने के बाद बोले अभिजीत बनर्जी

इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बनर्जी ने गरीबी दूर करने वाली कांग्रेस की न्याय स्कीम में अहम सुझाव दिए थे।

Author कोलकाता | Updated: October 14, 2019 8:30 PM
58 वर्षीय अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। (फाइल फोटो)

अर्थशास्त्र के लिए 2019 का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था डंवाडोल स्थिति में है। उन्होंने कहा कि इस समय उपलब्ध आंकड़ें यह भरोसा नहीं जगाते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था जल्द पटरी पर आ सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति डगमगाती हुई है। वर्तमान (विकास के) आंकड़ों को देखने के बाद, (निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार) को लेकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता है।’’ बनर्जी ने अमेरिका से एक समाचार चैनल को बताया, ‘‘पिछले पांच-छह वर्षों में, हमने कम से कम कुछ विकास तो देखा, लेकिन अब वह आश्वासन भी खत्म हो गया है।’’

58 वर्षीय अर्थशास्त्री बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी भी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी जल्दी नोबेल पुरस्कार मिल जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले 20 वर्षों से शोध कर रहा था। हमने गरीबी उन्मूलन के लिए समाधान देने की कोशिश की।’’ इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बनर्जी ने गरीबी दूर करने वाली कांग्रेस की न्याय स्कीम में अहम सुझाव दिए थे।

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अभिजीत बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो के साथ नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गयी है। वो अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। इसी इन्स्टीट्यूट में बनर्जी अपनी पत्नी एस्थर के पीएचडी सुपरवाइजर भी रहे हैं। बनर्जी वर्तमान में एमआईटी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं। 1990 में जोशुआ एंगरिस्ट के साथ वह डुफ्लो के पीएचडी सुपरवाइजर थे। पीएचडी शोध निबंध में वह इस निष्कर्ष पर पहुंची थीं कि विकासशील देशों में ज्यादा शिक्षा पाने वालों को ज्यादा वेतन मिलता है।

दोनों की शादी 2015 में हुई थी और उन्होंने साथ मिलकर ‘गुड इकोनॉमिक्स इन हार्ड टाइम्स’ लिखी जो इसी हफ्ते बाजार में आने वाली है। फ्रांसीसी मूल की डेफ्लो अर्थव्यवस्था में पुरस्कार पाने वाली सबसे युवा और दूसरी महिला हैं। दंपति को हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल क्रेमर के साथ ‘‘इंट्रोड्यूसिंग न्यू एप्रोच टू ऑब्टेनिंग रिलायबल आंसर्स अबाउट द बेस्ट वेज टू फाइट ग्लोबल पोवर्टी’’ की खातिर नोबेल पुरस्कार हासिल हुआ है। डुफ्लो और बनर्जी ने साथ मिलकर दर्जनों शोध पत्र प्रकाशित करवाएं हैं। उन्होंने ‘पुअर इकोनॉमिक्स’ नाम से एक और किताब साथ- साथ लिखी है जो गरीबी उन्मूलन पर उनके कार्यों के दशकों पुराने अनुभव का दस्तावेजीकरण है।

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