चीन पर बोलते वक्त यूएन में बंद हो गया भारतीय राजनयिक का माइक, भारत को कूटनीतिक गड़बड़ी का शक

संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव लियू झेनमिन ने माइक ठीक होने के बाद खेद जताते हुए कहा, हम कुछ तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके लिए मुझे खेद है।

Priyanka Sohani, China, CPEC
भारतीय राजनयिक प्रियंका सोहनी(फोटो सोर्स: फेसबुक/PTI)।

दूसरे संयुक्त राष्ट्र सतत परिवहन समेलन में भारत ने चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिश्एटिव’ (BRI) और इसकी परियोजना चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर अपनी सख्त आपत्ति जताई। हालांकि जब यूएन में भारत की तरफ से विरोध जताया जा रहा था तब अचानक भारतीय राजनयिक प्रियंका सोहनी का माइक बंद हो गया।

बता दें कि माइक को लेकर आए व्यवधान को ठीक करने में कई मिनट लगे। दरअसल बैठक की मेजबानी खुद चीन कर रहा था। ऐसे में चीन के खिलाफ हो रहे भारतीय राजनयिक के संबोधन में माइक बंद होना सवालों के घेरे में है। हालांकि कुछ देर बाद इस दिक्कत को ठीक कर लिया गया लेकिन तबतक दूसरे वक्ता का वीडियो स्क्रीन पर शुरू हो गया था। फिलहाल संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव लियू झेनमिन ने इसे रोक दिया और भारतीय दूतावास में द्वितीय सचिव प्रियंका सोहनी से अपनी बात खत्म करने के लिए आग्रह किया।

बता दें कि झेनमिन चीन के पूर्व उप विदेश मंत्री हैं। वहीं माइक ठीक होने के बाद झेनमिन ने कहा, ‘प्रिय सदस्यों, हम कुछ तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे थे कि अगले स्पीकर का वीडियो शुरू हो गया। इसके लिए मुझे खेद है।’ इसके बाद उन्होंने सोहनी से अपना भाषण जारी रखने के लिए कहा।

अपनी बात रखते हुए सोहनी ने कहा, ‘हम भौतिक साझेदारी बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आकांक्षा साझा करते हैं। हम मानते हैं कि बराबर और संतुलित व्यवस्था से प्रत्येक के लिए यह व्यापक रूप से आर्थिक लाभ देगा।’ सम्मेलन में BRI के जिक्र पर उन्होंने कहा, ‘जहां तक चीन के BRI की बात है, इसकी वजह से असमान रूप से हम प्रभावित हुए हैं। इसे तथाकथित चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा में शामिल करना भारत की संप्रभुता में दखलंदाजी करना है।’

बता दें कि सोहनी से पहले एक पाकिस्तानी राजनयिक ने बीआरआई और सीपीईसी के तारीफ की। उन्होंने इसे क्षेत्र के लिए निर्णायक बताया। वहीं सोहनी ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी देश इस तरह की किसी भी पहल को अपना समर्थन नहीं दे सकता जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसकी अहम चिंताओं की नजरंदाज करता हो।

गौरतलब है कि बीआरआई जिनपिंग द्वारा 2013 में सत्ता में आने पर शुरू की गई एक मल्टी बिलियन डॉलर की परियोजना है। इसका उद्देश्य चीन के प्रभाव को बढ़ाना और दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को भूमि और समुद्री मार्ग से एक नेटवर्क में जोड़ना है।

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