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‘भारत विरोधी नारे लगाने वालों से निपटने के लिए संविधान में प्रावधान नहीं’

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि भारतीय संविधान में भारत विरोधी नारे लगाने वाले राष्ट्र विरोधी तत्वों से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

भारतीय संविधान में भारत विरोधी नारे लगाने वाले राष्ट्र विरधी तत्वों से निपटने के लिए प्रावधान नहीं है। यह जानकारी बुधवार (19 दिसंबर, 2018) को केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर ने दी। उन्होंने राज्यसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर आतंकवादी और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित हुआ है जो सीमा पार से ढाई दशकों तक समर्थित है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने एक लिखित सवाल के जवाब में कहा, ‘भारतीय संविधान में भारत विरोधी नारे लगाने वाले राष्ट्र विरोधी तत्वों से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। संविधान में भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों पर पत्थरबाजी के खिलाफ भी कोई प्रावधान नहीं है।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हालांकि कुछ ऐसे अपराधियों से जम्मू-कश्मीर में लागू प्रासंगिक कानूनों के प्रावधानों के तहत निपटा जाता है।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे के अलावा राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी मुद्दे पर भी बात की थी। बीते मंगलवार को उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में एनआरसी को असम के अलावा किसी दूसरे राज्य में क्रियान्वित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। लोकसभा में प्रसून बनर्जी के प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘एक गैर-सांविधिक प्रक्रिया के तौर पर साल 1951 की जनगणना के दौरान शामिल किए गए सभी व्यक्तियों के विवरण को रिकॉर्ड करते हुए 1951 में असम में एनआरसी तैयार किया गया था।’ हंसराज अहीर ने कहा, ‘नागरिकता अधिनियम – 1955 और नागरिकता नियमावली – 2003 के तहत असम राज्य के लिए विशेष प्रावधानों के अंतर्गत एनआरसी 1951 को अपडेट करने का काम किया जा रहा है। वर्तमान में असम के अलावा अन्य राज्यों में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर के विस्तार का कोई प्रस्ताव नहीं है।’

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