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सेना ने बनाई नई युद्ध रणनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-रोबोटिक्‍स का करेगी इस्तेमाल

नई नीति के अनुसार, सेना के सभी कॉम्बैट ऑपरेशन इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (आईबीजी) में होंगे।

भारतीय सेना का जवान व पुणे में डेमो के दौरान बम खोजने व उसे निस्तारित करने वाला रिमोट संचालित वाहन दक्ष। (फोटोः Pixabay/एक्सप्रेस-आशीष काले)

भारतीय सेना ने दुश्मनों से युद्ध में निपटने के लिए नई रणनीति तैयार कर ली है। देश के जवान इसके तहत आने वाले समय में माइक्रो सैटेलाइट, डायरेक्टेड-एनर्जी वाले हथियार, ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स सरीखी आधुनिक चीजों का इस्तेमाल करेंगे। सेना के नए लैंड वॉरफेयर डॉक्टरीन-2018 (नया युद्ध सिद्धांत) के मुताबिक, देश की सेना इस वक्त चीन और पाकिस्तान के साथ सरहद पर अनसुलझी तनाव की स्थिति के प्रबंधन की वजह से ‘नो वॉर, नो पीस’ (न जंग, न शांति) वाले हालात से गुजर रहा है, जिसमें दूसरे देशों की ओर से हमले या फिर आतंकी गतिविधियों को सीमा के उस पार से अंजाम दिया जाता है।

टीओआई की रिपोर्ट में इसी सिद्धांत के हवाले से पाकिस्तान को लेकर कहा गया कि साल 2016 में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की तरह भारतीय सेना के आतंकवादी विरोधी ऑपरेशन जारी रहेंगे, ताकि दुश्मनों और आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके, जबकि चीन को लेकर बताया गया कि सेना चीन के साथ एलओसी पर तनाव के मुद्दे पर हल निकालने के लिए कदम उठाएगी।

नई नीति के अनुसार, सेना के सभी कॉम्बैट ऑपरेशन इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (आईबीजी) में होंगे। यही नहीं, सेना की आगामी योजना में एआई और रोबोटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। युद्ध में यह जीत दिलाने में अधिक कारगर साबित होगी। माइक्रो सैटेलाइट्स, हल्के और बड़ी क्षमता वाले ट्रांसपोंडर्स और आउटर स्पेस सैटेलाइट भी जरूरत पड़ने पर लॉन्च किए जाएंगे। ये सारी चीजें भविष्य में सेना की अहम जरूरतें होंगी।

नई नीति में बताया गया कि कि पारंपरिक युद्धों के दौरान सेना जमीन, हवा और अन्य जरियों से दुश्मनों को कड़ा जवाब देगी। बटालियन में इन्फैंट्री (पैदल सैनिक), तोपें, विमान, सिग्नल्स और इंजीनियर्स (जिन्हें पीछे से हेलीकॉप्टर सुरक्षा देंगे) शामिल होंगे, जो कि मेजर जनरलों के अंतर्गत आएंगे।

घाटी के लिए क्या है प्लान?: जम्मू और कश्मीर में आतंकियों को नेस्ताबूद करने के लिए एक नई नीति बनाई गई है। सरकार और सुरक्षाबलों ने आतंकियों पर ईनामी रकम को बढ़ा दिया है। कुछ अन्य रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि जम्मू-कश्मीर सरकार आतंकियों को किसी प्रकार का मौका नहीं देना चाहती है, लिहाजा आतंकियों पर ईनामी रकम बढ़ाई गई है।

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