भारत के रक्षा मंत्रालय ने इंडियन आर्मी के लिए 30 लो लेवल लाइटवेट रडार (एलएलएलआरआई) और दो क्लासरूम वेरिएंट रडार (सीवीआर) खरीदने के लिए करीब 725 करोड़ रुपये के बजट के साथ रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है।
इन रडारों की खरीद फास्ट ट्रैक/इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत की जाएगी। रडार ऐसे बनाए जाएंगे कि इन्हें पहाड़ी इलाकों में, ऊंचाई इलाकों, मैदानों, अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्रों में आसानी से तैनात किया जा सके।
आकाशतीर से जुड़ेंगे रडार
मंत्रालय के अनुसार, ये रडार सेना के आकाशतीर कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम से पूरी तरह जुड़े रहेंगे। इसके लिए पहले जरूरी हॉर्डवेयर और सॉफ्टवेयर पहले से ही सिस्टम में शामिल होना जरूरी होगा। साथ ही इन्हें सेना डेटा नेटवर्क से जोड़ने के लिए सेना के साइबर ग्रुप के मानकों पर भी खरा उतरना होगा।
एयरस्पेस की करेगा निगरानी
एलएलएलआर-आई रडार एक अत्याधुनिक एयर सर्विलांस सिस्टम होगा, जो एयरस्पेस की निगरानी करेगा। यह सिस्टम दुश्मन के प्लेन, हेलिकॉप्टरों और ड्रोन जैसे एयर लक्ष्यों को पहचाने, ट्रैक करने और खतरे के हिसाब से प्राथमिकता तय करने में सक्षम होगा। इसमें एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों ट्रैक करने की क्षमता होगी।
कितने किलोमीटर तक करेगा काम?
RFP के अनुसार, यह रडार एक साथ एक समय पर कम से कम 20 लक्ष्यों की जानकारी 10 कमांड पोस्ट या 10 हथियार प्रणालियों तक भेज सकेगा। यह सिस्टम रडार से 20 किमी तक की दूरी पर काम कर सकेगा। कनेक्टिविटी लाइन, रेडियो या रेडियो रिले के जरिए की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इसे 20 टारगेट डेटा रिसीवर (टीडीआर) तक बढ़ाया जा सकेगा।
इस खरीद में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामान अनिवार्य की गई है, जिससे देश के रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
रडार की समयसीमा कितनी?
पहले दौर में डिलीवरी एडवांस भुगतान के 12 माह के भीतर करनी होगी, जिसमें 15 रडार और 1 सीआरवी होगी। बाकी रडार अगले छह माह में सौंपे जाएंगे। रडार सिस्टम की न्यूनतम सेवा अवधि 10 साल तय की गई है।
टेंडर में शामिल होने वाले कंपनी को ऑपरेटरों, ट्रेनरों औऱ मेंटनेंस स्टाफ के लिए पूरी ट्रेनिंग पैकेज देना होगा। मेंटेनेंस ट्रेनिंग पहले सिस्टम की वारंटी समाप्त होने से तीन से छह माह पहले कराना जरूरी होगा।
एलएलएलआर-आई सिस्टम में सर्च रडार, कमांडर डिस्प्ले यूनिट, टारगेट डिजिग्नेशन सिस्टम और पावर सप्लाई यूनिट शामिल हैं। इसे कुछ ऐसे डिजाइन किया जाएगा कि यह संवेदनशील इलाकों और अहम ठिकानों की एयर डिफेंस में मदद कर सके।
एयर डिफेंस निगरानी क्षमता बढ़ेगी
रक्षा क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस खरीद से इंडियन आर्मी की एयर डिफेंस निगरानी क्षमता बढ़ेगी और देश की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी। आगे पढ़िए ‘जो उचित समझो वो करो’, जानिए जनरल नरवणे के संस्मरण में 2020 में लद्दाख टकराव पर क्या कहा गया
