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सेना का राजनीतिक इस्तेमाल रोकने को राष्ट्रपति को चिट्ठी: रिटायर्ड जे. शंकर राय चौधरी ने कहा- मैंने किए हैं दस्तखत, दो दिग्गजों का इनकार

चिट्ठी में लिखा गया है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा भारतीय सेना को 'मोदी जी की सेना' कहा गया जो कि साफ तौर पर सेना का राजनीतिकरण हैं।

Author Updated: April 13, 2019 10:32 AM
पूर्व सैन्य प्रमुखों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है और सेना के राजनीतिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

पूर्व सैन्य प्रमुखों और कई सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी है और सेना के राजनीतिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। राष्ट्रपति को लिखी इस चिठ्ठी में सेना के 150 पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं और उन्होंने इसपर दस्तख्त किए हैं। बता दें कि भारत के राष्ट्रपति भारतीय सेना के कमांडर होते हैं। पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा भारतीय सेना को ‘मोदी जी की सेना’ कहा गया जो कि साफ तौर पर सेना का राजनीतिकरण है। हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से सीएम को नोटिस जारी किया गया लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिखा।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल रोड्रिगुएज और पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने बाद में ऐसी किसी भी चिट्ठी पर दस्तख्त से साफ इनकार किया। हालांकि रिटायर्ड जनरल शंकर राय चौधरी ने अंग्रेजी अखबार दे टेलिग्राफ से बातचीत में साफ किया कि उन्होंने इसपर दस्तखत किए हैं। बता दें कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जनरल रोड्रिगुएज और सूरी का हवाला देते हुए चिट्ठी को फर्जी करार दिया था।

उन्होंने कहा कि चिट्ठी में किए गए दस्तख्त फर्जी हैं। हालांकि यह पूछे जाने पर कि इसमें कई पूर्व सैन्य अधिकारियों के दस्तख्त भी हैं तो उन्होंने इसपर जवाब नहीं दिया। वहीं राष्ट्रपति भवन की तरफ से कहा गया है कि उन्हें अभीतक ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह चिट्ठी इमेल के जरिए राष्ट्रपति को भेजी गई है।

खास बात यह है कि चिट्ठी में दस्तख्त करने वालों में एडमिरल रामदास और पूर्व सेना अध्यक्ष विष्णु भागवत भी हैं। बीते दिनों एडमिरल रामदास ने चुनाव आयोग से सत्तारूढ़ दल द्वारा सेना के राजनीतिक इस्तेमाल पर शिकायत की थी। जबकि विष्णु भागवत ऐसे इकलौते सेनाध्यक्ष हैं, जिन्हें आजाद भारत में पहली बार 1998 में एनडीए सरकार द्वारा बर्खास्त किया गया था।

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