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सेना भर्ती में फर्जीवाड़ा: 125 युवाओं के साथ धोखाधड़ी, तीन जवानों के शामिल होने का खुलासा

पुलिस के मुताबिक, "धेंबरे, कोचिंग सेंटर के जरिए नए-नए अभ्यर्थियों को निशाना बनाता था। सेना में भर्ती के नाम पर वे प्रति कैंडिडेट दो से पांच लाख वसूलते थे, जबकि कई बार तो रकम किश्तों में भी लेते थे।"

Author नई दिल्ली | Updated: July 16, 2019 5:24 PM
indian army recruitment scam, pune military, satara police, army jawans, sangli, solapur, pune news, hindi news, india news, jansatta newsतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

भारतीय सेना की भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पुलिस को शक है कि एक कथित रैकेट ने कम से कम 125 युवाओं के साथ धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जांच में यह भी पता लगा कि यह रैकेट सेना की भर्ती से जुड़े नकली लेटर जारी कर वारदात को अंजाम दे रहा था। मार्च, 2019 में पुणे स्थित साउदर्न कमांड की मिलिट्री इंटेलिजेंस यूनिट और सतारा पुलिस ने संयुक्त रूप से इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया था, जिसमें तीन जवान शामिल हैं।

संयुक्त अभियान में सबसे पहले अधिकारियों ने सेना भर्ती से जुड़े एक कोचिंग सेंटर के मालिक को उसके सहयोगी के साथ मार्च में गिरफ्तार किया था, जबकि दो और लोगों को बाद में अरेस्ट किया गया था। पुलिस ने सेना के तीनों जवानों की पहचान कर ली है, जिनमें दो हवलदार रैंक के हैं और एक सिपाही है। इन्होंने 2017 की शुरुआत से 2018 के अंत तक धोखाधड़ी का यह खेल खेला था।

वहीं, पुलिस ने सतारा मके श्रीपलवन गांव में कोचिंग सेंटर चलाने वाले की शिनाख्त विष्णु धेंबरे (36) के रूप में की, जबकि उसके साथियों में भगवान शिरतोड़े (29), शुभम शिंदे (23) और सुनील पवार (30) शामिल हैं। इन्हीं लोगों ने सैन्य संस्थानों से जुड़े फर्जी कागजात और जाली मोहरें तैयार करने में उसकी मदद की थी।

फर्जीवाड़े में लिप्त तीन जवानों में से एक मौजूदा समय में महाराष्ट्र के पुणे में पोस्ट है, जबकि दूसरा जम्मू-कश्मीर में तो तीसरा यूपी के लखनऊ में है। हालांकि, स्कैम के दौरान ये तीनों ही पुणे में पोस्टेड थे। मामले की जांच कर रहे सतारा पुलिस के लोकल क्राइम ब्रांच में पुलिस इंस्पेक्टर विजय कुंभार ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “धेंबरे, कोचिंग सेंटर के जरिए नए-नए अभ्यर्थियों को निशाना बनाता था। सेना में भर्ती के नाम पर वे प्रति कैंडिडेट दो से पांच लाख वसूलते थे, जबकि कई बार तो रकम किश्तों में भी लेते थे।”

पुलिस के मुताबिक, पैसे लेने के बाद वे अभ्यर्थियों को शुरुआती प्रक्रिया पूरी होने का चकमा देते थे और मेडिकल परीक्षा का इंतजार करने के लिए कहते थे। अधिकतर मामलों में अभ्यर्थियों का पुणे के मिलिट्री अस्पताल में मेडिकल टेस्ट कराया जाता था, जो कि पूरी तरह से फर्जी होता था। इसी दौरान फर्जीवाड़े में शामिल जवान सामने आए और वे इन मेडिकल टेस्ट को कम से कम भीड़ रहने के दौरान कराते थे।

बकौल इंस्पेक्टर, “मिलिट्री यूनिट के फर्जी रीक्रूटमेंट लेटर इसके बाद अभ्यर्थियों को दिए जाते थे। हमें शक है कि इस तरह से लगभग 125 लोगों को ठगा गया। हमने तीनों जवानों को गिरफ्तार करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।” फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं और लोग या जवान इस फर्जीवाड़े में तो नहीं शामिल हैं।

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