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सेना में बड़ा संकट: मेजर ने नष्‍ट किए बड़ी मात्रा में बरामद हथियारों के रिकॉर्ड, ले. कर्नल के हवाले से रिपोर्ट में दावा

लेफ्टिनेंट कर्नल नंदा ने चिठ्ठी में गंभीर आरोप लगया है कि लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह ने सेना के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में अवैध हथियारों को छिपा कर रखा था, जिसे 2 जुलाई 2018 को सीओ, दीमापुर ने बरामद किया था।

Author नई दिल्ली | July 12, 2019 9:55 PM
मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी शुरु। (AP Photo/Mukhtar Khan)

मणिपुर में तैनात सेना के एक मेजर ने भारी मात्रा में बरामद हथियारों के रिकॉर्ड नष्ट कर दिए हैं। सेना के ही एक लेफ्टिनेंट कर्नल ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में मेजर के खिलाफ ये बातें कही हैं। ये मामला मणिपुर के 3 कॉर्प्स इंटेलिजेंस एंड सर्विलांस यूनिट (CISU) का है।
लेफ्टिनेंट कर्नल ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी को बताया है कि इसी यूनिट के एक प्रमुख ने आर्म्स रिकवरी से संबंधित आधिकारिक मूल दस्तावेजों को नष्ट कर दिया है। बेहिसाब हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी जुलाई 2018 में यूनिट परिसर के अंदर से हुई थी।

द वायर की एक खबर के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल आर पी नंदा ने दूसरे लेफ्टिनेंट कर्नल धरमवीर सिंह के खिलाफ चल रहे मुकदमे मे बतौर गवाह ये बातें कही हैं। नंदा ने ही सिंह से 3 CISU यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर का पदभार संभाला है। फिलहाल लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में तैनात हैं, जहां इस मामले की सुनवाई चल रही है।

लेफ्टिनेंट कर्नल नंदा की लिखित शिकायत पर ही लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह के खिलाफ ये ट्रायल चल रहा है। नंदा ने पिछले साल 2 जुलाई 2018 को यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर को लिखे खत में शिकायत की थी कि 1 जुलाई 2018 को इंफाल के एम सेक्टर में उनके पूर्वाधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह ने भारी मात्रा में हथियार बरामद किए थे। 3 कॉप्स का हेडक्वार्टर दीमापुर में है।

लेफ्टिनेंट कर्नल नंदा के मुताबिक लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह ने 1 जुलाई 2018 की सुबह मेजर बी एस राठौर की मौजूदगी में अवैध तरीके से गिरफ्तारी की थी। मेजर राठौर वहीं अधिकारी हैं, जिनपर हथियारों की बरामदगी के रिकॉर्ड फाड़ने के आरोप हैं। हथियारों की बरामदगी के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह को हेडक्वार्टर दीमापुर बुला लिया गया था।

लेफ्टिनेंट कर्नल नंदा ने चिठ्ठी में गंभीर आरोप लगाए हैं कि लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह ने सेना के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में अवैध हथियारों को छिपा कर रखा था, जिसे 2 जुलाई 2018 को सीओ, दीमापुर ने बरामद किया था। इस बीच लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी को बताया कि उन्हें न तो इन आरोपों के बारे में बताया गया और न ही स्पष्टीकरण मांगा गया, जो सेना के नियमों का उल्लंघन है।

सिंह ने आरोप लगाया कि सेना के कुछ अधिकारी मिलकर उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने 9 सितंबर, 2016 को सीओ को खत लिखकर कुछ अधिकारियों के एक छात्र की रहस्यमयी हत्या में शामिल होने के बारे मे सूचना दी थी। आरोप है कि ये अधिकारी मारे गए छात्र सतीश और चार अन्य मणिपुरी युवाओं से जबरन वसूली का कमीशन वसूलते थे, जिसमें जोरहट डकैती भी शामिल है। बता दें कि असम के जोरहट डकैती केस ने हलचल मचा दी थी। ये घटना 2011 में हुई थी। इसमें 15 पुलिसकर्मियों पर डकैती में शामिल होने के आरोप लगे थे।

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