ताज़ा खबर
 

भारतीय सेना ने पाकिस्तान से लगती सीमा पर तैनात किए अमेरिका और इटली में ट्रेंड एलीट स्नाइपर कमांडो

भारतीय सेना के स्नाइपर कमांडो को जो नई राइफलें उपलब्ध कराई जा रही हैं, उनमें अमेरिका में निर्मित बरेट एम95 राइफलों को एंटी-मैटीरियल (धातु वेधने में सक्षम कारतूस) राइफल कहा जाता है। इनकी रेंज 1800 मीटर तक है।

Author नई दिल्ली | May 29, 2019 6:04 AM
स्पेशल यूनिट्स के कमांडो दस्ते को बरेटा प्वाइंट 338 लापुआ मैग्नम स्कॉरपियो टीजीटी और बैरेट प्वाइंट 50 कैलिबर एम95 राइफलों से लैस किया गया है। (एक जवान की फाइल फोटो)

पाकिस्तान से लगती सीमा और नियंत्रण रेखा पर तैनात किए जाने वाले अमेरिका और इटली में प्रशिक्षण लेकर आए एलीट स्नाइपर कमांडो भारतीय सेना ने तैनात किए हैं। स्पेशल यूनिट्स के कमांडो दस्ते को बरेटा प्वाइंट 338 लापुआ मैग्नम स्कॉरपियो टीजीटी और बैरेट प्वाइंट 50 कैलिबर एम95 राइफलों से लैस किया गया है। ये राइफलें हल्की हैं और 1800 मीटर दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम हैं। बर्फ पिघलने के साथ सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ शुरू हो जाती है। घुसपैठियों को कवर फायर देने के लिए पाकिस्तानी चौकियों से गोलीबारी बढ़ जाती है। इसके मद्देनजर सेना ने अग्रिम तैयारी के तहत मोर्चे पर खतरनाक स्नाइपर तैनात किए हैं। इन स्नाइपर कमांडो की मारक पहुंच पाकिस्तानी चौकियों तक हो गई है।

स्नाइपर कमांडो को मिली राइफलें इस्पात को भेदकर दुश्मन का काम तमाम करने में सक्षम हैं। थल सेना में जम्मू कश्मीर में तैनात एक कमांडर के मुताबिक, सीमा पर तैनात किए गए एलीट कमांडो को नए तरह के कई प्रशिक्षण दिए गए हैं, जो हर तरह के अभियान में काम आएंगे। उन्हें कई तरह के नए हथियारों को चलाने की भी ट्रेनिंग दी गई है। सेना अभी तक जो स्नाइपर राइफलें इस्तेमाल करती रही है, वह रूस में निर्मित ड्रागुनोव राइफलें हैं, जो अब चुनौतियों के लिहाज से पुराने पड़ चुके माने जा रहे हैं। इनकी मारक क्षमता एक हजार मीटर तक की रही है। जबकि, पाकिस्तानी सेना के स्नाइपरों ने ज्यादा मारक क्षमता वाली राइफलें इस्तेमाल करनी शुरू कर दी हैं।

भारतीय सेना के स्नाइपर कमांडो को जो नई राइफलें उपलब्ध कराई जा रही हैं, उनमें अमेरिका में निर्मित बरेट एम95 राइफलों को एंटी-मैटीरियल (धातु वेधने में सक्षम कारतूस) राइफल कहा जाता है। इनकी रेंज 1800 मीटर तक है। इस राइफल को दुनिया के कई बड़े देशों के विशेष कमांडो दस्ते इस्तेमाल कर रहे हैं। 10 किलो वजन की इन राइफलों की कारतूस प्वाइंट-5 ब्राउनिंग मशीन गन के कारतूसों के आकार की होती हैं। अमेरिका और इटली की सेना 1995 से इन राइफलों का इस्तेमाल कर रही हैं। इसकी मैग्जीन में एक साथ पांच राउंड भरे जा सकते हैं।

नियंत्रण रेखा पर तैनात कमांडो को जो दूसरी राइफल दी गई है, वह इटली की कंपनी बरेटा द्वारा बनाई गई प्वाइंट 338 लापुआ मैग्नम स्कॉरपियो टीजीटी है। इस राइफल का इस्तेमाल अमेरिकी सेना अफगानिस्तान और ईराक में कर चुकी है। यह राइफल 1500 मीटर तक मार कर सकती है। दुनिया के 30 बड़े देशों के एलीट कमांडो इन राइफलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सेना की मांग पर जल्द ही भारत में इन राइफलों और इनके कारतूसों का उत्पादन करने की योजना की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X