थल सेना के लिए खरीदे जाएंगे 40 हजार करोड़ के हथियार- Indian army finalises Rs 40,000 crore procurement plan to replace ageing weapons - Jansatta
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थल सेना के लिए खरीदे जाएंगे 40 हजार करोड़ के हथियार

भारतीय थल सेना ने इन्फैंट्री के आधुनिकीकरण के लिए सबसे बड़ी खरीद योजनाओं में से एक को अंतिम रूप दे दिया है।

Author नई दिल्ली | October 30, 2017 12:25 AM

भारतीय थल सेना ने इन्फैंट्री के आधुनिकीकरण के लिए सबसे बड़ी खरीद योजनाओं में से एक को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत करीब 40,000 करोड़ रुपए की लागत से बड़ी संख्या में हल्की मशीनगन, कार्बाइन और असॉल्ट राइफलें खरीदी जा रही हैं। नए हथियार पुराने और चलन से बाहर हो चुके हथियारों की जगह लेंगे। करीब सात लाख राइफल, 44 हजार लाइट मशीन गन (एलएमजी) और करीब 44,600 कार्बाइन की खरीद की विस्तृत प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना पर लंबे समय से इन खरीद प्रस्तावों को मंजूरी देने का दबाव था। चीन और पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते खतरे को देखते हुए यह चिंता और बढ़ गई थी। विदेश से हथियारों की खरीद के साथ ही रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ को भी अपने स्तर पर लाइट मशीनगन जैसे छोटे हथियार तैयार करने को कहा है। अगले कुछ ही दिनों में एलएमजी की खरीद के लिए ‘जानकारी का अनुरोध’ (रिक्वेस्ट फॉर इंफॉरमेशन, आरएफआइ) जारी की जाएगी। कुछ महीने पहले ही रक्षा मंत्रालय ने 7.62 कैलिबर बाकी पेज 8 पर गन्स के लिए फील्ड ट्रायल के बाद मैदान में एक ही कंपनी के बचे रहने के कारण प्रस्ताव रद्द कर दिया था।

खरीद प्रक्रिया में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘नई असॉल्ट राइफल के लिए ‘जनरल सर्विस क्वालिटी रिक्वायरमेंट्स’ (जीएसक्यूआर) को अंतिम रूप दे दिया गया है। खरीदारी योजना को मंजूरी के लिए जल्द ही डीएसी के पास भेजा जाएगा।’ बताते चलें कि ईशापुर की सरकारी राइफल फैक्टरी में निर्मित असॉल्ट राइफल को जून में सेना ने अस्वीकार कर दिया था। ये हथियार परीक्षण में नाकाम साबित रहे थे।

असॉल्ट राइफलों की खरीदारी में विभिन्न कारणों से देरी हुई जिसमें इसकी विशेषताओं को अंतिम रूप देने में सेना की नाकामी भी शामिल है। जून माह में सेना ने करीब 44,600 कार्बाइन की खरीदारी की शुरुआती प्रक्रिया प्रारंभ की थी। इकलौते विक्रेता के बचे रह जाने पर निविदा रद्द कर दी गई थी। इस आरएफआइ पर कुछ वैश्विक हथियार निर्माताओं समेत करीब आधा दर्जन फर्मों ने दिलचस्पी दिखाई थी।

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