ताज़ा खबर
 

राफेल डील पर हुए दस्‍तखत, एक मिनट में 60 हजार फुट तक ऊपर जा सकता है यह विमान

राफेल करीब 3700 किलोमीटर तक मार कर सकता है। ये विमान 6 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को एक साथ ले जाने में सक्षम है।

राफेल लड़ाकू विमान की फाइल फोटो (फोटो- एपी)

भारत और फ्रांस के बीच अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान का सौदा हो गया है। भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर और फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान ने शुक्रवार (23 सितंबर) को  7.8 बिलियन यूरो (करीब 59 हजार करोड़ रुपये) के इस सौदे पर हस्ताक्षर किए। सौदे के तहत भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमान हासिल होंगे। सौदे के बाद भारतीय वायुसेना को तीन साल के भीतर पहला राफेल लड़ाकू विमान मिल जाएगा। इस करार के तहत सात साल के भीतर फ्रांस भारत को सभी 36 विमानों की आपूर्ति कर देगा। लड़ाकू विमान राफेल की खासियत है ऊंचे इलाकों में लड़ाई. राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है. यह 2200 से 2500 किलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है और इस उड़ान के दौरान वो 6 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ले जाने में सक्षम है. इसकी मारक क्षमता करीब 3700 किलोमीटर की है. 4700 किलो ईंधन की क्षमता वाला राफेल हवा में ईंधन भरने के बाद करीब 10 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है.

चीन और पाकिस्तान दोनों तरफ से युद्ध होने की स्थिति में भारत को लड़ाकू विमानों के 45 स्क्वैड्रन की जरूरत होगी। एक स्क्वैड्रन में 16-18 लडा़कू विमान होते हैं। भारतीय सेना के पास फिलहाल 34 स्क्वैड्रन ही हैं। 36 राफेल विमान मिलने से भारतीय वायु सेना की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। मौजूदा हवाई बेड़े में से तीन मिग-21 एम स्क्वैड्रन और दो मिग-27 यूपीजी स्क्वैड्रन 2018 में प्रयोग से बाहर हो जाएंगे। वहीं छह मिग-21 बाइसन स्क्वैड्रन 2022 में प्रयोग से बाहर हो जाएंगे। छह जगुआर स्क्वैड्रन, तीन मिराज-2000 स्क्वैड्रन और तीन मिग-2030 स्क्वैड्रन तक वायु सेना में रहेंगे। ऐसे में भारतीय वायु सेना को  राफेल विमानों की सख्त जरूरत थी।

इससे पहले लड़ाकू विमानों में आने वाली कमी को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 40 हल्के लड़ाकू विमान तेजस बनाने की इजाजत दे चुका है। इनमें से 20 तेजस विमान 2018 के मध्य तक वायु सेना को मिल जाएंगे। बाकी 20 तेजस विमान 2020 के मध्य तक तैयार हो जाएंगे। आज भी भारत वायु सेना की असल ताकत रूसी सुखोई एमकेआई विमान हैं।  एचएएल के नासिक संयंत्र में हर साल 12 सुखोई विमान तैयार किए जा रहे हैं। वायु सेना को उम्मीद है कि 2020 तक उसके पास 272 सुखोई विमान हो जाएंगे। हाल ही में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने संसद को बताया था कि भारत के पास मौजूद सुखोई विमानों में 53 प्रतिशत ही प्रयोग लायक हैं। ऐसे में राफेल सौद से भारतीय वायु सेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी।

Read Also: 29000 करोड़ रुपये कम कीमत पर मोदी सरकार ने पक्की की Rafale डील, भारत के पास होगा पाकिस्तान से ज्यादा ताकतवर जहाज

राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसाल्ट राफेल विमानों के साथ हवा से दुश्मन पर अचूक निशाना साधने वाली हथियार प्रणाली भी भारतीय वायुसेना को मुहैया कराएगी। राफेल लड़ाकू विमान में मीटीआर मिसाइल और माइका मिसाइल प्रणाली से लैस होगा। यह मिसाइल सिस्टम पाकिस्तान के पास मौजूद मिसाइल सिस्टम से ज्यादा घातक और संहारक होगा। राफेल खरीद समझौते के तहत डसाल्ट भारतीय वायुसेना और उसके पायलटों को प्रशिक्षण भी देगी। समझौते में यह प्रावधान भी होगा कि विमानों के साथ मिलने वाले हथियारों और मिसाइलों के रख रखाव का डिपो तैयार नहीं होने की स्थिति में फ्रांस छह माह तक अपने यहां इन सामनों को रखेगा और कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगा। इतना ही नहीं कंपनी विमान के कल पुर्जे सात साल तक शुरुआती मूल्य पर ही मुहैया कराएगी।

 

भारतीय वायु सेना की क्षमता भारतीय वायु सेना की क्षमता

Read Also: Video: पाकिस्तान में दिखाई दिए F-16 लड़ाकू विमान, शादिया छोड़ सकड़ों पर दिखे लोग

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App